इंटरनेशनल डे आफ हैप्पीनेस के बारे में जाने हिमाचल प्रदेश की कशिश से।
बाल लेखिका कशिश।
असल में खुशी एक ऐसी अनुभूति है ,जिसके लिए सभी जी रहे हैं अर्थात प्रत्येक व्यक्ति कुछ ना कुछ करता है ,तो उसके पीछे आखिर में खुशी ही कारण होती है।
मनुष्य या संसार का कोई भी प्राणी अपने हित के लिए सर्वप्रथम कार्य करता है। उसका यह हित ,उसकी खुशी में ही होता है ।
दुनिया भर में जीवन में खुशी के महत्व को अहमियत देने और खुशियां बनाये रखने के लिए “अंतर्राष्ट्रीय खुशी दिवस” 20 मार्च को मनाया जाता है ।
आज के इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में हर कोई अपनी खुशी की तलाश कर रहा है। क्योंकि लोग सोशल होना और वर्क बैलेंस करना भूल गए हैं। लिहाजा उन्हें हर छोटी-छोटी चीजों में खुशियां ढूंढनी पड़ती है।
खुशी को महत्व देते हुए तथा खुश होकर मेंटली और फिजिकली स्वस्थ रहने के उद्देश्य से सन 2013 में यूनाइटेड नेशंस द्वारा “इंटरनेशनल डे आफ हैप्पीनेस” की शुरुआत की गई थी ।
तभी से यह दिन हर साल 20 मार्च को मनाया जाता है। इसके पीछे “यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल डे आफ हैप्पीनेस एंड हैप्पी टेलीविजन” के संस्थापक ‘जैन एलियन’ का पूरा प्रभाव था ।उन सलाहकार ने हैप्पीनेस सेहत और आजादी को प्रत्येक व्यक्ति के लिए जरूरी माना और इस अधिकार के रूप में मान्यता देने के लिए अभियान चलाया ।
वर्ष 2024 “अंतर्राष्ट्रीय खुशहाली दिवस” की थीम :—“रिकनेक्टिंग फॉर हैप्पीनेस बिल्डिंग रेसीलीनेट कम्युनिटीज” है।
सभी को खुशी के इस दिन में हिस्सा लेना चाहिए। इस दिन को मनाने का सबसे सरल तरीका है यह है कि ,प्रसन्न और आनंदित रहे और दूसरों के लिए खुशियां बांटे ।
‘विश्व खुशहाली रिपोर्ट’ 2023 में भारत का 126 वां स्थान था।
“इंटरनेशनल डे आफ हैप्पीनेस” खुशी के महत्व को लोगों की मूलभूत अभिलाषा मानता है और व्यक्तियों ,समूहों और सरकार को हैप्पीनेस और सकारात्मकता को प्रसारित करने के लिए प्रोत्साहित करता है !
डिजिटल बाल मेला ने मार्च माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।
डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।
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