बताया है, क्या सीख देता है यह त्यौहार
बाल लेखक पीयूष योगी
गणेश चतुर्थी को श्री गणेश जी का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन को यादगार बनाने के लिए हम इसे गणेश चतुर्थी के नाम से जानते हैं। यह त्यौहार भारत में विभिन्न स्थानों पर मनाया जाता है। महाराष्ट्र में यह त्यौहार ज्यादा से ज्यादा संख्या में मनाया जाता है। इस दिन भव्य गणेश मूर्ति को स्थापित किया जाता है, और उसकी 9 दिनों तक पूजा की जाती है। बाद में उसे तालाब या नदी में विसर्जित किया जाता है।
गणेश विसर्जन इस बात का भी प्रतीक है कि मनुष्य मिट्टी से बना है और मिट्टी में ही मिल जाता है। 1893 के पहले यह त्यौहार घरों तक ही सीमित था पर 1893 में बाल गंगाधर तिलक ने अंग्रेजों के विरुद्ध जाकर यह त्यौहार मनाया और इसमें लोगों ने बढ़ – चढ़ कर हिस्सा लिया। तब से यह त्यौहार सामूहिक रूप से मनाया जाता है।
भगवान गणेश को शिक्षा का देवता माना जाता है। कहा जाता है कि गणेश जी की पूजा करने से बुद्धि का विकास होता है। इस गणेश चतुर्थी पर डिजिटल बाल मेला बच्चों से यह आशा करता है कि बच्चे भगवान गणपति से सद्बुध्दि की कामना करें।
डिजिटल बाल मेला बच्चों के बीच जागरूकता पैदा करने और उनकी कला को प्रदर्शित करने के लिए बच्चों द्वारा स्थापित एक मंच है। इसकी शुरूआत जयपुर की 10 वर्षीय जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। कोरोना काल में बच्चों की बोरियत दूर कर, उनकी कला को जनता के सामने लाना तथा बच्चों की रचनात्मकता को एक मंच प्रदान करना इसका मुख्य उद्देश्य है। इसके लिए डिजिटल बाल मेला अब तक कई अभियानों का आयोजन भी कर चुका है। हाल ही में डिजिटल बाल मेला ने सितंबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला के मोबाईल नंबर 8005915026 पर भेज सकते हैं। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को उनकी फोटो के साथ डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।
अधिक जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स को फाॅलो करें –
Facebook – https://www.fb.com/digitalbaalmela/
Instagram – https://instagram.com/digitalbaalmela
Twitter – https://twitter.com/DigitalBaalMela
YouTube –

