डिजिटल बाल मेला की तरफ से आप सभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

आइए जानते हैं की नव वर्ष की पूर्व संध्या किस प्रकार आयोजित होती है।

 

शिवाक्ष शर्मा।

 

2024 आने में अब केवल चंद घंटे ही बचे हैं। जिनका पिछला साल अच्छा गया वे लोग नये साल यही कामना करते हैं की नए साल भी उन्हें यू हीं ख़ुशियाँ मिलती रहें।

जिनके साथ बीते हुए साल में कुछ बुरा या दुखदायी हुआ वे ईश्वर से यही प्रार्थना करते हैं की आने वाला साल खुशियाँ एवं सौहार्द लाए।

नव वर्ष की पूर्व संध्या यानी 31 दिसम्बर की शाम पूरी दुनिया नए साल के जश्न में डूब जाती है। यह एक तरह से पूरी दुनिया में मनाया जाने वाला एक खुशी का त्योहार है। इस दिन को पूरी दुनिया के लोग त्योहार के रूप में मनाते हैं।  नए साल का जश्न मनाने में कई पोषित परंपराएं शामिल हैं, चाहे वह आतिशबाजी देखना हो, आधी रात होने से कुछ सेकंड पहले घड़ी की गिनती गिनना हो, या उन नए साल के संकल्पों को निर्धारित करना हो जो हमें आने वाले वर्ष में बदलाव करने का वादा करते हैं। जैसे-जैसे यह रोमांचक नया अध्याय करीब आता है, हम यह जानने के लिए भी उत्सुक हो जाते हैं कि आने वाला वर्ष हमारे लिए क्या लेकर आ सकता है।

नया साल लोगों के लिए अपने सभी बुरे अनुभवों को पीछे छोड़कर भविष्य में सकारात्मक कदम उठाने का समय है। आने वाले नए साल में हर कोई अपने और अपनों की खुशी, सेहत और समृद्धि की कामना करता है।

नए साल में हम पिछले साल की अपनी गलतियों से सीखते हैं, नया संकल्प या शपथ लेते हैं और पूरी ऊर्जा के साथ अपने काम को पूरा करने में लग जाते हैं, जिससे हमें सफलता मिलती है।

इस दौरान 31 दिसम्बर को अनेक तरह के रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मुंबई, बैंगलोर, दिल्ली जैसे महानगरों में लाइव शोज़ आयोजित किए जाते हैं। टेलीविजन पर अवार्ड शोज़ प्रस्तुत किए जाते हैं। दूरदर्शन पर भी अलग अलग रंगारंग कार्यक्रम दिखाए जाते हैं।

डिजिटल बाल मेला आप सबको नए साल की ढेर सारी बधाई देता है। उम्मीद है की नया साल आप सबके जीवन मे ढेर सारी खुशियां एवं सुख समृद्धि लाए। डिजिटल बाल मेला नए साल में बच्चों के लिए अनेक तरह के विकासात्मक आयोजन करता रहेगा।

डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

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