हिमाचल प्रदेश की अक्षरा ने राष्ट्रीय मानव तस्करी जागरूकता दिवस की जागरूकता पर डाला प्रकाश…

बाल लेखिका अक्षरा।

सियासत की बाजी वतन नोच लेगी
कफ़न उफ्फ़ शहीदों के जलते रहेंगे ।

आज राष्ट्रीय मानव तस्करी जागरूकता दिवस है । इस दिन का उद्देश्य मानव तस्करी पीड़ितों की स्थिति के बारें में जागरूकता बढ़ाने के साथ- साथ उनके अधिकारों को बढ़ावा देना और उनकी रक्षा करना है।
मानव तस्करी आजकल का एक भयानक और खतरनाक मुद्दा बन गया है।

तो चलिए जानते हैं कि मानव तस्करी को लेकर भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितने आंकड़े हैं ?
अगर आंकड़ों की बात करें तो रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीईआरबी) के अनुसार साल 2022 में 6500*मामले दर्ज किए गए जो की पिछले साल से भी अधिक थे । *एनसीआरबी के अनुसार तेलंगाना के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं । और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आधार पर 27.6 मिलीयन लोग मानव तस्करी से पीड़ित हैं।

हमारे देश में और विदेश में भी कुछ ऐसे मामले सामने आते हैं , जहां लोग कुछ मामलों को *सामने नहीं आने देते। अगर हम इस हिसाब से देखें तो हमारे देश में और विदेश में बहुत सारे लोग मानव तस्करी से पीड़ित हैं।

इसलिए अगर हम किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं, तो हमें उसकी मदद करनी चाहिए और लोगों को भी इसके बारे में जागरूक करना चाहिए।
हमारे देश में मानव तस्करी के कई बड़े कारण हैं , उन में से कुछ कारण हैं :-

गरीबी, अशिक्षा , देह व्यापार , आदि ।

2007 में , संयुक्त राज्य अमेरिका की सीनेट ने 11 जनवरी को *राष्ट्रीय मानव तस्करी जागरूकता दिवस के रूप में स्थापित करने के प्रस्ताव की पुष्टि की। 2010 में, राष्ट्रपति (ओबामा ) ने मानव तस्करी के प्रति जागरूकता फैलाई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तस्करी जाग‌रु‌कता‌दिवस‌ 30‌ जुलाई को होता है।

ऐसा प्रतीत होता है की ” मानो दास प्रथा गई और मानव तस्करी आ गई”।
मानव तस्करी से पीड़ित लोगों के लिए मेरी यह दुआ है कि:-

अपनी भी कुछ तो खबर कर या खुदा
रहमतों की इक नज़र कर या खुदा।।
तपते रिसते जिस्म के छालों पे तू ,
इक सबा का तो शजर कर या खुदा। ।

डिजिटल बाल मेला ने जनवरी माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

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