हिमाचल प्रदेश की कशिश ने दी राष्ट्रीय किसान दिवस की जानकारी…

बाल लेखिका कशिश।

भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है। देश की लगभग 50% आबादी कृषि पर आधारित है और किसान है।इसलिए वर्ष के एक दिन भारत के किसानों को विशेष अनुभव कराने ,उन्हे सम्मान देने के लिए प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय किसान दिवस मनाया जाता है।

भारत में राष्ट्रीय किसान दिवस प्रत्येक वर्ष 23 दिसंबर को मनाया जाता है।भारत के 5वे प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन पर एक किसान नेता ,जिन्होंने भारतीय किसानों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए नई नीतियों की शुरुआत की।यह विभिन्न कार्यक्रमों, वाद–विवादों,संगोष्ठियों, प्रश्नोतरी प्रतियोगिताओं,चर्चाओं,कार्यशालाओं,प्रदर्शनियों,निबंध लेखन प्रतियोगिताओं और कार्यों को आयोजित करके मनाया जाता है।

यह दिवस समाज में किसानों के योगदान और देश के समग्र आर्थिक एवं सामाजिक विकास के महत्व को समझने के लिए नागरिकों के बीच जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है।किसानों और अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका के बारे में लोगों को शिक्षित किया जाता है। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को ‘धरती पुत्र’ के नाम से भी जाना जाता है।क्योंकि उन्होंने कृषि के कार्यों को सरल बनाने के लिए अनेक कार्यों को प्रस्तावित किया था। भारत सरकार ने सन 2001 देश के पांचवे प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के जन्म दिवस 23 दिसंबर को ‘राष्ट्रीय किसान दिवस’ के रूप में मनाने की शुरुआत की थी।

वर्ष 2023 में ‘राष्ट्रीय किसान दिवस’ की थीम या विषय :

“स्थायी खाद्य सुरक्षा और लचीलेपन के लिए स्मार्ट समाधान प्रदान करना” है।

भारत के किसानों को विशेष अनुभव कराने के लिए यह विशेष ‘राष्ट्रीय किसान दिवस’ मनाया जाता है और देश भर के किसानों को उनके कठिन परिश्रम के लिए सहराया जाता है !

डिजिटल बाल मेला ने दिसंबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

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