एच.पी स्पीकर श्री कुलदीप सिंह पठानिया की अध्यक्षता में शिमला स्थित विधानसभा भवन में हुआ आयोजन…
68 “बाल विधायकों” ने प्रश्नकाल और नियम 324 का किया संपादन…
आदित्य शर्मा.
शिमला. “विश्व बाल श्रम निषेध दिवस” के अवसर पर 12 जून को हिमाचल प्रदेश राज्य के पहले विधानसभा “बाल सत्र” का सफलतापूर्वक समापन हुआ. एच.पी स्पीकर श्री कुलदीप सिंह पठानिया की अध्यक्षता में आयोजित हुए इस “बाल सत्र” में देश भर से चयनित 68 बाल विधायकों ने प्रश्नकाल और नियम 324 की विधायी प्रक्रिया का संपादन किया. इस अवसर पर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और विशिष्ट अतिथि राज्यसभा उपसभापति श्री हरिवंश मौजूद रहे. इसी के साथ हिमाचल प्रदेश की समस्त कैबिनेट एवं विधानसभा सदस्य भी बच्चों का मनोबल बढ़ाने पहुंचे. इस विशेष सत्र में अतिथि के तौर पर राजस्थान के शिक्षा मंत्री श्री बुलाकीदास कल्ला भी शामिल हुए.
स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि- आने वाला समय बच्चों का है। ऐसे “बाल सत्र” भविष्य के विधायक तैयार करने में बड़ी भूमिका निभायेंगे।

अपने संबोधन में राज्यसभा उपसभापति श्री हरिवंश ने कहा कि– इस प्रकार के बाल सत्र का आयोजन देश के हर राज्य में होना चाहिए, इसी के साथ उन्होंने सदन में बैठे माननीय सदस्यों को बाल विधायकों द्वारा की गई शांतिपूर्ण विधानसभा कार्यवाही सीखने का आग्रह किया।

सत्र के समापन संबोधन में मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह ने- बाल सत्र की कार्यवाही को सराहा और कहा कि बच्चों के सुझावों को नीति निर्माण में शामिल किया जाएगा। बाल सत्र में पूछे गए सवालों को सरकार प्रावधान में लाएगी। इतना ही नहीं बाल विधायक इक्षिता के सुझाव, ”कोरोना के बाद मानसिक परेशानियां, डिप्रेशन, स्ट्रेस, टेंशन जैसी समस्याएं खड़ी हो गईं हैं। ऐसे में सरकारी और प्राइवेट स्कूल में 10 मिनट के लिए हर रोज योग और मेडिटेशन का प्रावधान किया जाना चाहिए” इसपर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विशेष ध्यान दिया और विधानसभा ‘बाल सत्र’ में ऐलान किया कि हर रोज योग और मैडिटेशन के सुझाव का सरकार प्रदेश में जरूर प्रावधान लाएगी।

गौरतलब है कि शिमला स्थित विधानसभा भवन की कमान एक दिन के लिए “बाल विधायकों” के हाथों में थी. इस दिन बच्चों ने नशे की बढती लत, पर्यावरण संरक्षण, मेंटल स्ट्रेस को घटाने हेतु मैडिटेशन का प्रावधान, लैंडस्लाइड के रोकथाम हेतु सड़कों के किनारे जाली लगवाना, पार्किंग समस्या के कारण बाहर से आने वाली गाड़ियों पर अधिक कर लगाना, इलेक्ट्रिकल वाहनों का सुचारू संचालन, ऑनलाइन मेडिकल सुविधाएं, करियर काउंसलिंग, नयी शिक्षा नीति, पाठ्यक्रम में रंग-मंच का परिचय, आवारा पशुओं का निवारण सहित हिमाचल प्रदेश से जुडें कई स्थानीय मुद्दे सदन में उठाये. इतना ही नहीं इस ऐतिहासिक सत्र में नशे की बढती लत के कारण, विपक्ष ने बाल सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन भी किया, जिसके चलते पूरा विपक्ष नेता-प्रतिपक्ष के आवाहन पर सदन की वेळ में आ नारे बाज़ी करने लगा.
इस सत्र के समापन के बाद बच्चों ने अध्यक्ष, मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि के साथ ग्रुप फोटो भी खिंचवाई, साथ ही, सभी ने सी.एम व वहां मौजूद अन्य कैबिनेट मंत्री एवं विधायकों के साथ सेल्फी भी ली. इस दौरान मीडिया कर्मियों का विधानसभा सदन के बाहर भीड़ लगी रही, जिन्होंने बाल विधायकों के इंटरव्यू लिए.
डिजिटल बाल मेला की जहान्वी शर्मा ने बताया कि इस “बाल सत्र” को अंजाम देने के लिए, 4 माह पहले डिजिटल बाल मेला द्वारा एल.आई.सी द्वारा प्रायोजित बच्चों की सरकार कैसी हो? अभियान चलाया गया था. इस अभियान के तहत डिजिटल बाल मेला ने हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों में पहुँच कर बच्चों को इस बाल सत्र के लिए जागरूक किया. इस अभियान के तहत बाल मेला को 1,108 वीडियो एंट्रीज़ आई. इन एंट्रीज़ में से 68 बच्चों का चयन बाल मेला द्वारा गठित पैनल द्वारा 3 चरणों में किया गया. बता दें इन 68 बच्चों में 5 राज्य सहित हिमाचल प्रदेश की 43 विधानसभा क्षेत्रों के बच्चे मौजूद थे.
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