सिरमौर की कशिश ने भारतीय वायु सेना दिवस का इतिहास एवं महत्व बताया।

दुश्मन के हर परिंदो को हमने मार गिराया है।

मिराज जैसे विमानों ने हमेशा मान बढ़ाया है,

देश की रक्षा के लिए वीरों ने हमेशा प्राण गवाया है।

बाल लेखिका कशिश 

थल पर करतब करने के बाद अब बारी आकाश में अपना परचम लहराने की थी। इसके लिए भारतीय वायु सेना से बेहतर क्या हो सकता है।

जिसने समय–समय पर ऐसे ऑपरेशन किए है,जो भारत के लिए बहुत उपयोगी साबित हुए हैं। दुश्मनों को धूल चटाने से लेकर वायु और आकाश मंडल में अपना लोहा मनाने वाली

“भारतीय वायु सेना”का गठन 8अक्टूबर,1932 को हुआ था।आजादी से पूर्व इसे ‘रॉयल इंडियन एयरफोर्स’ के नाम से जाना जाता था। 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध में इस वायु सेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् इसमें से रॉयल शब्द हटाकर ‘इंडियन एयर फोर्स’ रखा गया।

‘भारतीय वायु सेना’ भारतीय सशस्त्र सेना का एक अंग है,जो वायु युद्ध ,वायु सुरक्षा और नभ सीमाओं की रक्षा करती है। वर्तमान में भारतीय वायु सेना विश्व की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना है। जिसमें 170,000 जवान एवं 1,905 से अधिक लड़ाकू विमान है। भारतीय वायु सेना का मुख्यालय नई दिल्ली में है। भारतीय वायु सेना का आदर्श वाक्य “नभः‌ स्पृशं दीप्तम” (आकाश को स्पर्श करने वाले देदीप्यमान) “Touch the sky with glory” है। भारत के राष्ट्रपति भारतीय वायु सेना के कमांडर इन चीफ के रूप में कार्य करते हैं।

भारतीय वायु सेना द्वारा भारतीय हवाई क्षेत्र की रक्षा करने, अंतरिक्ष अनुसंधानों में संयोजक के रूप में कार्य करने, आपदा राहत कार्यक्रमों में राहत सामग्री गिराने,खोज एवं बचाव अभियान करने आदि का काम भी “भारतीय वायु सेना” द्वारा किया जाता है।

‘भारतीय वायु सेना’ इस वर्ष अपनी 91वीं वर्षगांठ मना रही है। इस दिन भारतीय वायु सेना द्वारा किए कार्यों और देश के लिए किए गए योगदानों को सराहा जाता है। इस वर्ष भारतीय वायु सेना दिवस की थीम “सीमाओं से परे वायुशक्ति” है।

इस वर्ष भारतीय वायु सेना दिवस का कार्यक्रम प्रयागराज में मनाया जायेगा, जिसमें लगभग 120 लड़ाकू विमान भाग लेंगे।

निःसंदेह भारत की प्रत्येक सेना,प्रत्येक शक्ति समूचे विश्व में अपना परचम लहरा रही है। भारतीय वायु सेना भी लगातार ऐसे वायु ऑपरेशन करने में सफल रही है,जिसके द्वारा भारत को लाभ होने के साथ ही भारत की स्थिति और अधिक मजबूत हुई है।

डिजिटल बाल मेला बच्चों के बीच जागरूकता पैदा करने और उनकी कला को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करने के लिए बच्चों द्वारा स्थापित एक मंच है। डिजिटल बाल मेला सूचना प्रौद्योगिकी की शक्ति का उपयोग करके बच्चों को उनके रचनात्मक पक्ष को उजागर करने में मदद कर रहा है और इसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है।

आपको बता दें कि डिजिटल बाल मेले की शुरुआत 2020 में जयपुर की रहने वाली 10 साल की जान्हवी शर्मा ने की थी। डिजिटल बाल मेला अब तक कई अभियान चला चुका है जिनमें “राजस्थान विधानसभा बाल सत्र”, “हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र”, “मैं भी बाल सरपंच” आदि शामिल हैं।

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