जानिए फ्रेंच फ्राई डे के बारे में।
बाल लेखिका कशिश।
13 जुलाई को फ्रेंच फ्राई डे मनाया जाता है। फ्रेंच फ्राइज़ एक ऐसा फूड्स है जिसे ज्यादा लोग खाना पसंद करते हैं। फ्रेंच फ्राई आलू से तैयार फूड है जिसमें आलू को लंबी और पतली पट्टियों में काटा जाता है। इन आलूओं को कुरकुरा होने तक डीप फ्राई किया जाता है और पसंद के अनुसार नमक,जड़ी-बूटियां और मसालों के साथ पकाया जाता है।
इस आधुनिक फास्ट फूड की शुरुआत वर्ष 1680 में फ्रांस फोन बेल्जियम के नामुर में हुई थी, जहां स्थानीय लोग विशेष रूप से तली हुई मछली के शौकीन थे ।
उस समय कड़ाके की ठंड के दौरान न्यूज़ नदी जम गई और स्थानीय लोग अपनी पसंदीदा फूड को बेहद मिस कर रहे थे। उन्होंने छोटी मछलियों के बजाय आलू को काटा और उन्हें तला और उनका सेवन किया।
इस तरह फ्राइज आलू का जन्म हुआ।
ऐसा कहा जाता है ,की प्रथम विश्व युद्ध के समय फ्रेंको फोन क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों ने इस फूड को फ्रेंच फ्राइज कहना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे यह फ्रेंच फ्राई लोगों की पसंद बनता गया।
इसके नाम को लेकर कहा जाता है कि, वर्ल्ड वॉर के दौरान बेल्जियम सेवा की आधिकारिक भाषा फ्रांसीसी थी इस कारण से विश्व युद्ध के दौरान बसेरा बनाने वाले अमेरिकी सैनिकों ने इस स्नेक्स को फ्रेंच फ्राइज कहना शुरू कर दिया।
फ्रेंच फ्राइज की दीवानी सिर्फ आज की जनरेशन ही नहीं है, बल्कि यह सदियों से लोगों की पसंद में शुमार है। दुनिया भर में इस फूड को अलग-अलग नाम से जाना जाता है :—अमेरिका में इन्हें फ्रेंच फ्राइज, बेल्जियम में बेल्जियम फ्राइज़ ,फ्रांसीसी में पॉम फ्रेट्स, यूके में चिप्स और स्पेन में इन्हें पेटटास कहा जाता है। कई देशों में इसे फिंगर चिप्स के नाम से भी जाना जाता है।
राजस्थान के 75वें स्थापना दिवस के मौके पर डिजिटल बाल मेला ने नये अभियान “रूट्स ऑफ राजस्थान” की है। आपको बता दें की इस अभियान का उद्देश्य बच्चों के दृष्टिकोण से राजस्थान की कला, संस्कृति एवं पर्यटन को बढ़ावा देना एवं बच्चों को राजस्थान की विरासत से परिचित करवाना है।
इसमें बच्चों को आठ से दस मिनट तक की वीडियो बनानी है जिसमें राजस्थान के पर्यटन स्थल एवं राजस्थान की कला और संस्कृति का विवरण हो।
अपनी वीडियो को आप डिजिटल बाल मेला के टेलीग्राम, वाट्सएप एवं अधिकारिक वेबसाइट पर भेज सकते हैं। हर महीने सबसे श्रेष्ठ वीडियो भेजने वाले बच्चे को मोबाइल फोन ईनाम में मिलेगा एवं टॉप 100 बच्चों को विश्व पर्यटन दिवस पर यानी 27 सितंबर को तीन दिन का जयपुर भ्रमण करवाया जाएगा एवं तभी प्रथम स्थान पर रहने वाले बच्चे को पचास हज़ार का ईनाम, द्वितीय स्थान को बीस हज़ार, तृतीय स्थान को दस हज़ार के ईनाम से नवाज़ा जाएगा।
डिजिटल बाल मेला इससे पहले भी बच्चों की रचनात्मकता बढ़ाने के लिए “शेड्स ऑफ कोविड”
म्यूजियम थ्रू माय आइज” जैसे अभियानों का आयोजन कर चुका है।
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