जानिए हनुमानगढ़ के पारस माली से विश्व मूक बधिर दिवस के बारे में।
पारस माली।
International Day of the Deaf 2024 हर साल सितंबर के आखिरी मंगलवार को विश्व मूक बधिर दिवस यानी वर्ल्ड डेफ डे मनाया जाता है। यह दिन खासतौर पर बधिर समुदाय के लोगों से जुड़े कई सारे मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के मकसद से मनाया जाता है। इस साल यह दिन 24 सितंबर को मनाया जाता है। आइए जानते हैं क्या है इस दिन का इतिहास और इसका महत्व-नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। हर साल दुनियाभर में विश्व बधिर दिवस यानी वर्ल्ड डेफ डे मनाया जाता है। यह दिन बधिर (सुनने में असमर्थ) और कम सुनने वाले लोगों के सामने आने वाले मुद्दों और चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के मकसद से हर साल मनाया जाता है। यह दिन खासतौर पर बधिर लोगों की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता का जश्न मनाने, संचार के महत्वपूर्ण साधन के रूप में सांकेतिक भाषा को बढ़ावा देने और समाज में समान अवसर दिलाने के लिए समर्पित है। आइए जानते हैं इस खास दिन की तारीख से लेकर इतिहास तक के बारे में सबकुछ-
क्यों मनाया जाता है विश्व मूक बधिर दिवस?
साल 1958 में पहली बार द वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ द डेफ (डब्ल्यूएफडी) ने विश्व बधिर दिवस मनाया। यह एक ग्लोबल एनजीओ है, जिसका मकसद बधिर समुदाय के अधिकारों को आगे बढ़ाना और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। कई सोर्सेस में ऐसा दावा किया गया है कि विश्व बधिर दिवस ग्रानविले रिचर्ड सेमुर रेडमंड के सम्मान में मनाया जाता है।
हर साल विश्व मूक बधिर दिवस सितंबर के आखिरी मंगलवार को मनाया जाता है। ऐसे में बात करें इस साल इस दिन को मनाने की तारीख की, तो साल 2024 में यह दिन 24 सितंबर को मनाया जाता है।
विश्व मूक बधिर दिवस का महत्व क्या है?
इन दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य बधिर समुदाय के आम जीवन में आने वाली समस्याओं की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना है। सुनने में असमर्थ लोगों को अक्सर समाज में स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक अपनी पहुंच बनाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह दिन संचार के साधन के रूप में सांकेतिक भाषा के महत्व को उजागर करने पर जोर देता है। विश्व बधिर दिवस मनाने का एक और कारण है। यह दिन बधिर लोगों को पूर्ण और स्वतंत्र जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए भी मनाया जाता है।
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