जानिए होलिका दहन की कहानी।
इस साल 24 मार्च को होलिका दहन है और फिर उसके अगले दिन यानी 25 मार्च को होली मनाई जाएगी। होली की तरह होलिका का भी हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है। होलिका दहन की सुबह होलिका की पूजा में सरसों, तिल, 11 गोबर के उपले, अक्षत, चीनी और गेहूं के दाने व गेहूं की 7 बालियों का उपयोग किया जाता है। होलिका की पूजा करने के बाद होलिका की 7 बार परिक्रमा लगाते हुए जल अर्पित करना चाहिए।
होलिका दहन की कथा भगवान विष्णु के सच्चे भक्त प्रह्लाद और उनकी बुआ होलिका से जुड़ी हुई है।
सतयुग काल में हिरणकश्यप नामक एक बहुत ही क्रूर शासक हुआ करता था और अपने शक्ति के घमंड में चूर होकर वह स्वंय को ईश्वर समझने लगा था और चाहता था, कि उसके राज्य का हर एक व्यक्ति ईश्वर माने और ईश्वर स्वरुप उसकी पूजा करे। राज्य के सारे लोग उसकी पूजा करने लगे लेकिन इस बात को स्वंय उसके पुत्र प्रहलाद ने इंकार कर दिया। प्रहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। जिससे क्रुद्ध होकर हिरणकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को मारने का आदेश दिया। कई प्रयासों असफल होने के बाद अंत में अपने बहन होलिका के साथ मिलकर प्रहलाद को अग्नि में जलाकर मारने की योजना बनाई क्योंकि होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में नही जल सकती। तत्पश्चात वह प्रहलाद को गोद में लेकर चिता पर बैठ गयी परंतु ईश्वर श्री हरी ने प्रहलाद की रक्षा की और होलिका को उसके कर्मों का दंड देते हुए अग्नि में जलाकर भस्म कर दिया। इसके पश्चात भगवान हरी विष्णु ने स्वंय नरसिंह अवतार में अवतरित होकर हिरणकश्यप का वद्ध कर दिया। उस दिन बुराई पर अच्छाई की इस जीत को देखते हुए होलिका दहन मनाने की प्रथा शुरु हुई।
होलिका दहन का यह पर्व हमारे जीवन में एक विशेष महत्व रखता है, यह हमें सत्य और अच्छाई की शक्ति का अहसास दिलाता है। इस पर्व से हमें यह सीख मिलती है कि इंसान को कभी भी अपनी शक्ति तथा वैभव घमंड नही करना चाहिए।
डिजिटल बाल मेला ने मार्च माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।
डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।
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