जानिए जयपुर का आमेर महल क्यों है खास…

जानिए जयपुर का आमेर महल क्यों है खास।

इतिहास प्रेमियों में खास है ये किला।

शिवाक्ष शर्मा।

 

जयपुर शहर का नाम आते ही यहाँ के बड़े-बड़े और भव्य किले दिलोदिमाग में तैरने लगते हैं। और इन्हीं किलों में निसंदेह सबसे पहले जिस किले की छवि उभरती है वो है खूबसूरत आमेर का किला।
यह जयपुर जिले के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में से एक है। आमेर के विकसित होने से पूर्व यहाँ मीणा जनजाति के लोग निवास करते थे। इन्हें कच्छवाह राजपूतों ने बाद में अपने अधीन कर लिया। इन्हीं कच्छवाह राजपूतों के महान राजा महाराजा मान सिंह ने आमेर के दुर्ग का निर्माण कराया था। आमेर या अंबर किले का नाम मां अंबा देवी के नाम पर रखा गया है। ये किला राजस्थानी स्थापत्यकला और संस्कृति का नमूना है। ऊंची पहाड़ी पर बना आमेर का किला दूर से ही बेहद विशाल और खूबसूरत दिखाई देता है। अगर आप इतिहास प्रेमी हैं, तो आपको इस किले से जुड़ी कई बातों के बारे में जानना चाहिए।
आमेर किले के निर्माण की शुरुआत 16वीं शताब्दी के अंत में राजा मान सिंह ने की थी। हालांकि, जो निर्माण अभी है उसे पूरा सवाई जय सिंह द्वितीय और राजा जय सिंह प्रथम द्वारा पूरा किया गया था। राजा मान सिंह से लेकर सवाई जय सिंह द्वितीय और राजा जय सिंह प्रथम तक के शासन काल में इसे पूरा होने में 100 साल का समय लग गया था।
आमेर के किले में शिला देवी मंदिर स्थित है। इस मंदिर के पीछे एक रोचक कहानी है। माना जाता है कि राजा मान सिंह के सपनों में मां काली ने दर्शन दिए और उनसे जेसोर (बांग्लादेश के करीब स्थित एक जगह) के करीब अपनी प्रतिमा खोजने को कहा। राजा मान सिंह ने मां के आदेश का पालन किया, लेकिन उन्हें वहां मां की मूर्ति मिलने के बजाय एक बड़ा सा पत्थर मिला। मां शिला देवी की प्रतिमा खोजने के लिए इस पत्थर की सफाई की गई और इस तरह यहां शिला देवी का मंदिर बन गया। आज भी श्रद्धालुओं की इस मंदिर में गहरी आस्था है।
आमेर किले में देखने के लिए बहुत सारे आकर्षण हैं, जिनमें दीवान-ए-आम, सच मंदिर और शीश महल शामिल हैं। आमेर किले में कुछ भूमिगत सुरंगें भी हैं जो आमेर को जयगढ़ किले से जोड़ती हैं। इन सुरंगों का एक हिस्सा बहाल कर दिया गया है, और अब यह आम जनता के लिए भी खुला है। इन सब को समेटे हुए, आमेर किला राजस्थानी वास्तुकला का एक आदर्श उदाहरण है, जिसे अवश्य देखना चाहिए।

 

राजस्थान के 75वें स्थापना दिवस के मौके पर डिजिटल बाल मेला ने नये अभियान “रूट्स ऑफ राजस्थान” की है। आपको बता दें की इस अभियान का उद्देश्य बच्चों के दृष्टिकोण से राजस्थान की कला, संस्कृति एवं पर्यटन को बढ़ावा देना एवं बच्चों को राजस्थान की विरासत से परिचित करवाना है।
इसमें बच्चों को आठ से दस मिनट तक की वीडियो बनानी है जिसमें राजस्थान के पर्यटन स्थल एवं राजस्थान की कला और संस्कृति का विवरण हो। ये अभियान 30 जून तक चलेगा।
अपनी वीडियो को आप 30 जून तक डिजिटल बाल
मेला के टेलीग्राम, वाट्सएप एवं अधिकारिक वेबसाइट पर भेज सकते हैं। हर महीने सबसे श्रेष्ठ वीडियो भेजने वाले बच्चे को मोबाइल फोन ईनाम में मिलेगा एवं टॉप 100 बच्चों को विश्व पर्यटन दिवस पर यानी 27 सितंबर को तीन दिन का जयपुर भ्रमण करवाया जाएगा एवं तभी प्रथम स्थान पर रहने वाले बच्चे को पचास हज़ार का ईनाम, द्वितीय स्थान को बीस हज़ार, तृतीय स्थान को दस हज़ार के ईनाम से नवाज़ा जाएगा।
डिजिटल बाल मेला इससे पहले भी बच्चों की रचनात्मकता बढ़ाने के लिए “शेड्स ऑफ कोविड”
म्यूजियम थ्रू माय आइज” जैसे अभियानों का आयोजन कर चुका है।

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