जानिए जयपुर में स्थित विश्व धरोहर जंतर-मंतर के बारे में…

जानिए जयपुर में स्थित विश्व धरोहर जंतर-मंतर के बारे में।

शिवाक्ष शर्मा।

 

जो भी यात्री जयपुर घूमने जाता है, वह सिटी पैलेस और हवा महल के अलावा जंतर-मंतर भी अवश्य देखता है। यह जयपुर में देखने की सबसे प्रसिद्ध जगहों में से एक है, जिसे सिर्फ स्थानीय या भारतीय ही नहीं, विदेशी नागरिक भी देखना पसंद करते हैं। महाराजा सवाई जय सिंह द्वारा निर्मित जंतर-मंतर अपने आप में एक अजूबा है। यह सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया में सबसे बड़ा पत्थर से निर्मित एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्ज़र्वेट्री है। जंतर-मंतर यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज सूची में शामिल है। यहाँ पर मौजूद उपकरण और यंत्र बेहद पुराने होने के बावजूद भी आधुनिकता का प्रमाण देते हैं। इन बेहद पुराने उपकरणों से समय को मापा जाता है।
सटीक भविष्यवाणी करने के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध इस शानदार वेधशाला का निर्माण 1724 में जयपुर शहर के संस्थापक आमेर के राजा सवाई जय सिंह (द्वितीय) की व्यक्तिगत देखरेख में शुरू हुआ और 1734 में पूरा हुआ। सवाई जय सिंह खुद एक खगोल वैज्ञानिक थ जिनके कार्य और व्यक्तित्व की जवाहरलाल नेहरू ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ (‘भारत: एक खोज’) में प्रशंसा की थी।
महाराजा सवाई जयसिंह ने जयपुर में वेधशाला के निर्माण से पहले विश्व के कई देशों में अपने सांस्कृतिक दूत भेजकर वहां से खगोल विज्ञान के प्राचीन और महत्वपूर्ण ग्रन्थों की पांडुलिपियां मंगाई। उन्हें पोथीखाने में संरक्षित कर अध्ययन के लिए उनका अनुवाद कराया। उल्लेखनीय है संपूर्ण जानकारी जुटाने के बाद ही महाराजा ने जयपुर सहित दिल्ली, मथुरा, उज्जैन और वाराणसी में वेधशालाएं बनवाई। लेकिन सभी वेधशालाओं में जयपुर की वेधशाला सबसे विशाल है और यहां के यंत्र और शिल्प भी बेजोड़ है। महाराजा सवाई जयसिंह द्वारा बनवाई गई इन पांच वेधशालाओं में से सिर्फ जयपुर और दिल्ली की वेधशालाएं ही अपना अस्तित्व बचाने में कामयाब रही हैं। यूनेस्को ने 1 अगस्त 2010 को जयपुर के जंतर-मंतर सहित दुनिया के 7 स्मारकों को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने की घोषणा की थी।

राजस्थान के 75वें स्थापना दिवस के मौके पर डिजिटल बाल मेला ने नये अभियान “रूट्स ऑफ राजस्थान” की है। आपको बता दें की इस अभियान का उद्देश्य बच्चों के दृष्टिकोण से राजस्थान की कला, संस्कृति एवं पर्यटन को बढ़ावा देना एवं बच्चों को राजस्थान की विरासत से परिचित करवाना है।
इसमें बच्चों को आठ से दस मिनट तक की वीडियो बनानी है जिसमें राजस्थान के पर्यटन स्थल एवं राजस्थान की कला और संस्कृति का विवरण हो। ये अभियान 30 जून तक चलेगा।
अपनी वीडियो को आप 30 जून तक डिजिटल बाल
मेला के टेलीग्राम, वाट्सएप एवं अधिकारिक वेबसाइट पर भेज सकते हैं। हर महीने सबसे श्रेष्ठ वीडियो भेजने वाले बच्चे को मोबाइल फोन ईनाम में मिलेगा एवं टॉप 100 बच्चों को विश्व पर्यटन दिवस पर यानी 27 सितंबर को तीन दिन का जयपुर भ्रमण करवाया जाएगा एवं तभी प्रथम स्थान पर रहने वाले बच्चे को पचास हज़ार का ईनाम, द्वितीय स्थान को बीस हज़ार, तृतीय स्थान को दस हज़ार के ईनाम से नवाज़ा जाएगा।
डिजिटल बाल मेला इससे पहले भी बच्चों की रचनात्मकता बढ़ाने के लिए “शेड्स ऑफ कोविड”
म्यूजियम थ्रू माय आइज” जैसे अभियानों का आयोजन कर चुका है।

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