जानिए राजस्थान में स्थित देश की सबसे बड़ी खारे पानी की झील “सांभर झील” के बारे में…

जानिए राजस्थान में स्थित देश की सबसे बड़ी खारे पानी की झील “सांभर झील” के बारे में।

शिवाक्ष शर्मा।

राजस्थान अपने शाही वैभव, संस्कृति, किलों और महलों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। राजस्थान के विभिन्न स्थान कई वर्षों से पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहे हैं।
एक राजसी राज्य होने के नाते, राजस्थान अपने शाही भव्यता और रॉयल्टी के लिए जाना जाता है। यह अपनी सुंदर परंपराओं, संस्कृति, लोगों, इतिहास और स्मारकों के साथ दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करती है।
यूं तो राजस्थान का नाम सुनते ही अक्सर हमारे मन में एक बीयाबान रेगिस्तान जहां सिर्फ चिलचिलाती धूप और ऊंट पर बैठे कुछ लोगों की छवी बनती है। लेकिन हकीकत में राजस्थान में और भी बहुत कुछ है जो एक बार आखों में बसने के बाद कभी ओझल नहीं होगा।
यहां रेगिस्तान हैं लेकिन, यहां झीलों का शहर उदयपुर भी है। इसके अलावा यहां पिंक सिटी जयपुर भी अपनी सुंदरता बयान करता है। तो वहीं जयपुर के पास ही सांभर नाम की एक झील है।

सांभर झील समुद्र तल से 1,200 फुट की ऊंचाई पर है। भरे रहने पर इसका क्षेत्रफल 90 वर्ग मील में फैला रहता है। सांभर झील में तीन नदियाँ आकर गिरती हैं। इस झील की दिलचस्प बात ये है कि इससेे बड़े पैमाने पर नमक का उत्पादन किया जाता है। सांभर झील राजस्थान की सबसे बड़ी झील और भारत की सबसे बड़ी खारी झील है। राजस्थान का अधिकांश नमक उत्पादन 230 वर्ग किलोमीटर में फैली इस झील से ही होता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस नमक का स्रोत, अरावली के शिष्ट और नाइस के गर्तों में भरा हुआ गाद है। इस गाद में घुलने वाला सोडियम बारिश के पानी में घुसकर नदियों के रास्ते झील में आता है और नमक के रूप में रह जाता है।सांभर नमक भारत का एकमात्र नमक है जो प्राकृतिक रूप से आयोडीन युक्त होता है और इसमें 84 ऐसे दुर्लभ खनिज तत्व पाए जाते हैं, जिनका उपयोग एसिडिटी की दवा के रूप में किया जाता है। इतना ही नहीं सांभर नमक से बना काला नमक सबसे अच्छा प्राकृतिक रेचक (लैक्सेटिव) है और इसके कई चिकित्सीय लाभ हैं। इस नमक में सोडियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, सल्फेट और प्राकृतिक आयोडीन जैसे खनिज शामिल हैं। झील में हर साल 2,10,000 टन से ज्यादा नमक का उत्पादन होता है। इस नमक को हरियाणा, पंजाब सहित अन्य राज्यों में आयात किया जाता है।

पौराणिक मान्यताओं में भी इस झील का अपना एक महत्त्व है, महाभारत के अनुसार वर्षों पहले सांभर झील वाला क्षेत्र असुर राज वृषपर्वा के साम्राज्य का एक हिस्सा हुआ करता था और यहां असुरों के कुलगुरु शुक्राचार्य रहते थे। इसी जगह पर शुक्राचार्य की बेटी देवयानी का विवाह ययाति नरेश के साथ हुआ था। झील के पास में आज भी एक मंदिर है जो कि शुक्राचार्य की सुपुत्री देवयानी को समर्पित है। जनश्रुतियों के अनुसार एक प्रचलित कथा ऐसी भी है कि चौहान राजपूतों की रक्षक शाकम्भरी देवी ने यहां के एक जंगल को चांदी के मैदान में बदल दिया था। जिसको लेकर लोग खूब झगड़ने लगे जिस वजह से यह झील मानवता के लिए अभिशाप साबित होने लगी। आगे चलकर लोगों ने देवी से अपना वरदान वापस लेने का जब आग्रह किया तो देवी ने सारी चांदी को नमक में बदल दिया।

सांभर झील जाना बहुत आसान है। यह जयपुर से करीब 80 किमी दूर है। जयपुर पहुंचने के बाद आराम से बस से यहां जाया सकती है। गर्मियों में सांभर झील जाने पर इतना मजा नहीं आता जितना कि बारिश और सर्दियों के मौसम में आता है। सर्दियों में यहां पहुंचने पर नमक की खेती देखने का आनंद मिलता है।

राजस्थान के 75वें स्थापना दिवस के मौके पर डिजिटल बाल मेला के नये अभियान “रूट्स ऑफ राजस्थान” की शुरुआत की गई है। आपको बता दें की इस अभियान का उद्देश्य बच्चों के दृष्टिकोण से राजस्थान की कला, संस्कृति एवं पर्यटन को बढ़ावा देना एवं बच्चों को राजस्थान की विरासत से परिचित करवाना है।
इसमें बच्चों को आठ से दस मिनट तक की वीडियो बनानी है जिसमें राजस्थान के पर्यटन स्थल एवं राजस्थान की कला और संस्कृति का विवरण हो। ये अभियान 30 जून तक चलेगा।
अपनी वीडियो को आप 30 जून तक डिजिटल बाल
मेला के टेलीग्राम, वाट्सएप एवं अधिकारिक वेबसाइट पर भेज सकते हैं। हर महीने सबसे श्रेष्ठ वीडियो भेजने वाले बच्चे को मोबाइल फोन ईनाम में मिलेगा एवं टॉप 100 बच्चों को विश्व पर्यटन दिवस पर यानी 27 सितंबर को तीन दिन का जयपुर भ्रमण करवाया जाएगा एवं तभी प्रथम स्थान पर रहने वाले बच्चे को पचास हज़ार का ईनाम, द्वितीय स्थान को बीस हज़ार, तृतीय स्थान को दस हज़ार के ईनाम से नवाज़ा जाएगा।
डिजिटल बाल मेला इससे पहले भी बच्चों की रचनात्मकता बढ़ाने के लिए “शेड्स ऑफ कोविड”
म्यूजियम थ्रू माय आइज” जैसे अभियानों का आयोजन कर चुका है।

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