रामनगर की अंजलि ने साक्षरता दिवस का बताया महत्त्व।

शिक्षा ही है हर कुरीति को मिटाने का एकमात्र तरीका। 

 बाल लेखिका अंजलि 

डिजिटल बाल मेला द्वारा बच्चों की लेखन कला को सामने को सामने लाने के लिए हाल ही में एक अभियान की शुरुआत की गई है। इसके तहत बच्चे सितंबर माह में आने वाले विशेष दिनों पर आर्टिकल लिख रहे हैं। आज विश्व साक्षरता दिवस पर हिमाचल प्रदेश के रामनगर निवासी अंजली ने अपने विचार व्यक्त किए हैं। अंजली ने अपने इस आर्टिकल में साक्षरता का महत्व बताया है।

विश्व साक्षरता दिवस

विश्व में हर साल 8 सितंबर को साक्षरता दिवस मनाया जाता है। साक्षरता दिवस को मनाने का कारण यह है कि सभी को शिक्षा के बारे में उच्च जानकारी प्राप्त हो सके। विश्व में अभी तक 80 करोड लोग शिक्षा से वंचित है और इसमें सबसे अधिक महिलाओं की संख्या है अक्सर उच्च स्तर की शिक्षा तक आते-आते लड़कियों की शिक्षा रोक दी जाती है।

 एक और चिंता का विषय यह है कि 15 वर्ष की आयु के 9 करोड़ बच्चे शिक्षा से वंचित है । ये बच्चे बाल मजदूरी कर रहे हैं इन बच्चों तक शिक्षा पहुंचाई जा सके इसलिए शिक्षा का प्रचार हर जगह किया जाता है। हर देश में जो शिक्षा कि सामाजिक परेशानी है इसे दूर करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा हर साल साक्षरता दिवस मनाया जाता है और लोगों को जागरूक किया जाता है। आज के समय में शिक्षा के बिना कोई भी व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता आधुनिक युग में ज्ञान के माध्यम बढ़ते जा रहे हैं व्यक्ति घर में रहकर भी शिक्षा को प्राप्त कर सकता है। अनपढ़ व्यक्ति सभी सुविधाओं से वंचित रह सकता है। अनपढ़ व्यक्ति लोकतंत्र के दिए गए अधिकारों का प्रयोग नहीं कर पाता और नहीं उसमें इतनी समझी होती है कि उसे इनका प्रयोग किस तरह करना चाहिए । शिक्षा का असर राष्ट्र की विकास दर पर पड़ता है जिस देश के नागरिक अधिक पढ़े-लिखे होते हैं वही देश अधिक उन्नति करता है। आज हमारा देश गरीबी , अंधविश्वास ,स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही से गुजर रहा है इन सब का एक उपाय है शिक्षा। शिक्षा से इन सभी से छुटकारा मिल जाएगा ।

 “बहुत हुआ अब चूल्हा चौका बेटियों को दो पढ़ने का मौका।”

धन्यवाद।

डिजिटल बाल मेला बच्चों के बीच जागरूकता पैदा करने और उनकी कला को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करने के लिए बच्चों द्वारा स्थापित एक मंच है। डिजिटल बाल मेला सूचना प्रौद्योगिकी की शक्ति का उपयोग करके बच्चों को उनके रचनात्मक पक्ष को उजागर करने में मदद कर रहा है और इसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है।

आपको बता दें कि डिजिटल बाल मेले की शुरुआत 2020 में जयपुर की रहने वाली 10 साल की जान्हवी शर्मा ने की थी। डिजिटल बाल मेला अब तक कई अभियान चला चुका है जिनमें “राजस्थान विधानसभा बाल सत्र”, “हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र”, “मैं भी बाल सरपंच” आदि शामिल हैं।

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