भ्रष्टाचार पर सवाल उठाने वाली “रिजुल रांगता” को चुना संवाद सत्र का लीडर…
आदित्य शर्मा.
जयपुर. डिजिटल बाल मेला और L.I.C के देशव्यापी नवाचार बच्चों की सरकार कैसी हो? अभियान के तहत 22 मई सोमवार को बच्चों ने राजनीति में धन-बल की ज़रूरत को समझा. यह मौका था बच्चों के संवाद सत्र का, जिसमें बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मुख्य संसदीय सचिव श्री राम कुमार. इस सत्र में उन्होंने “राजनीति में धनबल कितना ज़रूरी होता है” विषय पर हिमाचल प्रदेश विधानसभा “बाल सत्र” के बाल विधायक दावेदारों से संवाद किया.
दोपहर 12 बजे आयोजित इस संवाद सत्र की शुरुआत में विधायक राम कुमार ने बच्चों से अपना शुरुआती राजनीतिक जीवन साझा किया और बताया कि उन्होंने 2006 में न चाहते हुए भी लोगों की जिद के कारण जिला परिषद का चुनाव लड़ा और इसमें जीत भी हासिल की. राजनीति के इस पड़ाव में उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास हेतु कई कार्य किये. इसके फल स्वरूप उनके क्षेत्र की 15 ग्राम पंचायतों को राष्ट्रपति निर्मल सम्मान से नवाज़ा गया.
मुख्य संसदीय सचिव राम कुमार ने बताया राजनीती में धन-बल क्यों ज़रूरी-
सत्र के विषय पर चर्चा करते हुए माननीय विधायक ने कहा कि राजनीति में वोटिंग के समय नहीं अपितु धन बल की आवश्यकता वोटिंग से पहले एवं वोटिंग के बाद होती है. उन्होंने स्वयं का उदाहरण देते हुए बताया कि वह गरीब बच्चों की शिक्षा, शादी, धार्मिक यात्राएँ, खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन, विद्यालय की मरम्मत एवं दान आदि करते रहते है. इन कामों को करने के लिए विधायक फण्ड का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. ऐसे में उन्हें अपनी जेब से पैसा देना पड़ता है. यह कार्य समाज कल्याण के लिए ज़रूरी है और इनके लिए धन और कभी-कभी बल की आवश्यकता भी होती है. मुख्य अतिथि राम कुमार चौधरी ने सत्र में मौजूद बाल प्रत्याशियों के प्रश्नों के जवाब भी दिए.
बच्चों द्वारा पूछे गए कुछ प्रश्न-
सवाल- हिमाचल से भानुप्रिया ने पूछा कि चुनावों के समय प्रचार के लिए काले धन के इस्तेमाल की रोकथाम हेतु चुनाव आयोग ने क्या कार्य किये है?
जवाब- इसके जवाब में मुख्य संसदीय सचिव राम कुमार चौधरी ने बताया कि चुनाव में प्रत्याशी एक सीमा तक ही राशि खर्च कर सकता है. वर्तमान समय में आयोग प्रत्याशी के साथ एक अधिकारी नियुक्त करता है जो चुनावी रैली में वीडियो, पोस्टर्स पर खर्च होने वाली राशि का ऑडिट करता है और सीमा राशि के उल्लंघन पर प्रत्याशी के खिलाफ कार्यवाही के लिए आयोग को सूचित करता है.
सवाल- शिमला से “रिजुल रांगता” ने अपना सवाल अतिथि के सामने रखते हुए पूछा कि राजनीति में धन का दुरुपयोग होने से क्या भ्रष्टाचार नहीं बढ़ता?
जवाब- इसके जवाब में मुख्य अतिथि ने कहा कि भ्रष्टाचार सिर्फ राजनीति में नहीं है जहाँ भी पैसा सम्मिलित है वहां भ्रष्टाचार है. ऐसे में नागरिकों को यह तय करना होगा कि वह भ्रष्टाचार को बढ़ावा न दें और सही तरीके से अपने कार्य कराये. जब समाज में नैतिकता आएगी तभी भ्रष्टाचार पर रोक लगना संभव है. हालाँकि मैं यह नहीं कहता कि नेता भ्रष्ट है और जो है उन पर कार्यवाही होती है और वह आज किसी जेल में है.
गौरतलब है कि “रिजुल रांगता” के इस प्रश्न से प्रभावित होकर सत्र के मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मुख्य संसदीय सचिव राम कुमार चौधरी ने उन्हें सत्र का लीडर घोषित किया.
बच्चों की सरकार कैसी हो? अभियान-
Digital Baal Mela की फाउंडर जान्हवी शर्मा ने बताया कि बच्चों की सरकार कैसी हो? अभियान हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग के तत्वाधान में हो रहा है. बच्चों की राजनीतिक जागरूकता को बढ़ाने के लिए शुरू किये गए इस अभियान के तहत 12 जून को हिमाचल प्रदेश विधानसभा “बाल सत्र” का आयोजन होगा. इस ऐतिहासिक बाल सत्र में देश भर से 68 बाल विधायक मुख्यमंत्री, स्पीकर, नेता – प्रतिपक्ष एवं विधायक की भूमिका में नज़र आयेंगे. इस सत्र की ख़ास बात यह रहेगी कि, इसमें बच्चे सरकार और समाज के सामने बच्चों से जुड़े सघन मुद्दें उठाएंगे.
इस सत्र के साक्षी बतौर मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश विधानसभा स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया एवं मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू बनेंगे. बता दें कि रोज़ हजारों की संख्या में हिमाचल के बच्चे इन सत्रों से जुड़ रहे है. 8-17 वर्ष के बाल प्रत्याशी बच्चों की सरकार कैसी हो? अभियान में 25 मई तक रजिस्टर कर सकते है.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बच्चों को यह वीडियो हमारी वेबसाइट www.digitalbaalmela.com पर रजिस्टर करनी आवश्यक है.
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