शिमला की खुशी ने प्राथमिक चिकित्सा पर रखे अपने विचार…

हर विद्यालय को चिकित्सा के विषय पर करना चाहिए आयोजन 

बाल लेखिका खुशी  

 

आज विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस है| शिमला की ख़ुशी ने इस दिन का महत्त्व बताने वाला यह आर्टिकल डिजिटल बाल मेला को भेजा है| पढ़िए ख़ुशी ने इस दिन के बारे में क्या लिखा है –

हम सबको कभी न कभी चोट तो लगी ही है। उस वक्त हमारे सबसे ज्यादा काम कौन आता है? हम में से ज्यादातर लोगों का जवाब होगा हमारी मदद करने वाले। परंतु यदि इन्हीं मदद करने वालों को प्राथमिक उपचार देने का ज्ञान न हो तो? इसी चिकित्सा के ज्ञान को बढ़ाने के लिए व जागरुकता लाने के लिए मनाया जाता है ‘विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस’।

विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस की शुरुआत इंटरनेशनल फैडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड करिसेंट सोसाइटीज़ (IFRC) ने 2000 में की थी। तब से हर साल सितंबर माह के दूसरे शनिवार को विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस मनाया जाता है ।

छोटी से लेकर बड़ी चोटों का दर्द कम किया जा सकता है , सही चिकित्सा के ज्ञान की मदद से। परंतु यह बहुत दुर्भाग्य की बात है कि भारत में अट्ठानवे (98) प्रतिशत लोग इस सार्थक वेदज्ञ को नहीं जानते हैं । ऐसे लोगों में जागरुकता लाना बहुत ज़रूरी है क्योंकि इन लोगों को हमेशा सही मदद नहीं मिल सकती । इस सामान्य सी जानकारी को सीखने के लिए मात्र 1-2 घंटे व गंभीरता से सीखने के लिए 5-6 घंटे लगते हैं । घर में घंटों तक यूट्यूब देखने से अच्छा है कि हम ऐसे वेदत्व को सीखे जिससे हम अपनी जान के साथ – साथ दूसरे लोगों की जान भी बचा सकते हैं ।

इसके लिए हर एक विद्यालय को चिकित्सा के विषय पर कम से कम एक बार तो कार्यक्रम रखना ही चाहिए । नुक्कड़ नाटक जैसे अन्य माध्यमों के सहारे लोगों को इस ज्ञान के फायदे बताने चाहिए । इस जानकारी को अपने तक ही सीमित नहीं रखना , क्योंकि जितना यह बटेगी उतना ही बड़ेगी व लोगों को सही मदद मिलेगी ! ऐसे ही छोटे – छोटे कदमों से लोगों को जागरूक कर हम अपने आस – पास की जानें बचा सकते हैं|  तो आइये इस दिवस को केवल मनाने के लिए नहीं बल्कि ज्ञान बढ़ाने के लिए भी मनाएँ व दूसरो की मदद भी करें।

धन्यवाद।

डिजिटल बाल मेला बच्चों के बीच जागरूकता पैदा करने और उनकी कला को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करने के लिए बच्चों द्वारा स्थापित एक मंच है। डिजिटल बाल मेला सूचना प्रौद्योगिकी की शक्ति का उपयोग करके बच्चों को उनके रचनात्मक पक्ष को उजागर करने में मदद कर रहा है और इसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है।

आपको बता दें कि डिजिटल बाल मेले की शुरुआत 2020 में जयपुर की रहने वाली 10 साल की जान्हवी शर्मा ने की थी। डिजिटल बाल मेला अब तक कई अभियान चला चुका है जिनमें “राजस्थान विधानसभा बाल सत्र”, “हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र”, “मैं भी बाल सरपंच” आदि शामिल हैं।

 

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