राष्ट्रीय पर्यटन दिवस पर हिमाचल प्रदेश की वंशिका ने दी जानकारी…

 

बाल लेखिका वंशिका

 

भारत में न तो घुमक्कड़ों की कमी है और न ही यहां घूमने वाली जगहों की कमी है | यहीं कारण है कि विदेश से भी पर्यटक यहां घूमने के लिए आते हैं| भारत अपनी विविधताओं के लिए मशहूर है। भारत में कई भाषाएं बोली जाती हैं। राज्यों की अलग अलग संस्कृति और परंपराएं हैं। ऐतिहासिक किस्सों से भरपूर देश में कई पर्यटन स्थल हैं। भारत समेत दुनियाभर से लोग देश के खूबसूरत नजारों को देखने के लिए आते हैं। भारतीय पर्यटन स्थलों के प्रचार प्रसार के लिए प्रतिवर्ष राष्ट्रीय पर्यटन दिवस मनाया जाता है। पर्यटन दिवस के माध्यम से देश विदेश तक भारत की ऐतिहासिकता, खूबसूरती, प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति का प्रचार प्रसार किया जाता है।भारत में राष्ट्रीय पर्यटन दिवस 25 जनवरी को मनाया जाता है। इसे मनाने की शुरुआत आजादी के बाद वर्ष 1948 में हुई है | इस दिन को मनाने का उद्देश्य पर्यटन के माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। वैश्विक स्तर पर पर्यटन के सामाजिक, राजनीतिक, वित्तीय और सांस्कृतिक मूल्य के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करना है। राष्ट्रीय पर्यटन दिवन का भारत में खास महत्व है | यह करोड़ों लोगों के रोजगार का साधन है. इसके अलावा यह भारत सांस्कृतिक, शैक्षिक, व्यवसाय, खेल, ग्रामीण, चिकित्सा, क्रूज और इको- टूरिज्म जैसे कई प्रकार के पर्यटन प्रदान करता है|

हमारे देश में लगेगी धूप-छांव ,
मिलेगे रंग कई देखना शहर-ओ-गांव|
हमारा देश है हमारे ही मन का आंगन,
इस धरा के चरण को चूमता है नीलगगन|
न जाने कैसी है इस देश की माटी से लगन,
जो यहां आता है हो जाता है देश मगन|
घूम के देखो तुम भी देश मेरा ,
हमारे देश में आने लगेगी धूप-छांव|
मिलेंगे रंग कई देखना शहर-ओ-गांव,
कई मौसम यहां जीवन के गीत गाते हैं|
सभी का प्रेम देख देव मुस्कुराते हैं,
रिश्ता कोई भी हो श्रद्धा से सब निभाते हैं।
अपने दुःस और तनाव पे जीत पाते हैं,
शांति को टापू है, नहीं है ज्यादा कांव |
हमारे देश में आने लगेगी धूप – छांव,
मिलेंगे रंग कई देखना शहर-ओ-गांव।

 

डिजिटल बाल मेला ने जनवरी माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

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