इन्टरनेट के माध्यम से कैसे बदला जा सकता है चिकित्सा व्यवस्था स्वरूप…

“बाल सत्र”

“बाल सत्र” में  सदस्य आदित्य ने रखा सदन में अपना सुझाव…

आदित्य शर्मा.
जयपुर. हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग के तत्वाधान में डिजिटल बाल मेला और एल.आई.सी द्वारा प्रायोजित विधानसभा “बाल सत्र” का समापन सफलतापूर्वक हुआ. इसके तहत बाल विधायकों ने नशे से लेकर शिक्षा सभी मुद्दों पर प्रकाश डाला. प्रश्नकाल के बाद हुई नियम 324 की कार्यवाही में पक्ष के विधायक और चंबा से बाल प्रत्याशी आदित्य ने प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था के डिजिटलीकरण का सुझाव दिया.

उन्होंने अपने सुझाव में बताया कि जब-

तक सरकार प्रदेश के हर नागरिक को उचित चिकित्सा उपलब्ध नहीं करा सकती, जब तक हमें ऑनलाइन मेडिकल काउंसलिंग का प्रयोग लेना चाहिए. उन्होंने उप-सभापति राघव कल्ला को संबोधित करते हुए बताया की हिमाचल राज्य इन्टरनेट यूसेज में ऊपरी पायदान पर आने वाला प्रदेश है, ऐसे में राज्य चिकित्सा विभाग को निजी अस्पतालों की तर्ज पर ऑनलाइन मेडिकल काउंसलिंग का प्रावधान करना चाहिए, इससे जिन गावों में डॉक्टर समय पर नहीं पहुँच पाते है वहां के लोगों को भी स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध की जा सकेगी. इसी के साथ ऑनलाइन दवाइयों की ख़रीद जैसी किसी योजना पर भी सरकार कार्य कर सकती है.

डिजिटल बाल मेला की को-फाउंडर प्रिया शर्मा ने बताया कि जब विपक्ष द्वारा यह मुद्दा सदन में उठाया जा रहा था, तब हिमाचल प्रदेश के चिकित्सा मंत्री श्री धनी राम शांडिल इस बाल सत्र में मौजूद थे. उन्होंने यह भी बताया कि रजिस्ट्रेशन के दौरान हिमाचल प्रदेश के कई बच्चों ने चिकित्सा के प्रति चिंता व्यक्त की.

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