ऐतिहासिक बाल सत्र के संपादन में क्यों किया गया शामिल…
आदित्य शर्मा.
शिमला. 12 जून को शिमला स्थित विधानसभा भवन में आयोजित हुए ऐतिहासिक बाल सत्र में प्रश्नकाल की कार्यवाही के बाद नियम 324 के अंतर्गत सदन चलाया गया. ऐसे क्या आपको पता है हिमाचल प्रदेश विधानसभा का नियम 324 क्या होता है? और इसमें सदस्य और मंत्री क्या और कैसे भूमिका निभाते है. इन सभी सवालों के जवाब मिलेंगे आपको आज के इस लेख में. हम आपको बताएं कि इस सत्र में सदस्य ने क्या सुझाव दिया इससे पहले आपको इस नियम या प्रक्रिया को समझना अनिवार्य है.
शून्यकाल-
हिमाचल प्रदेश राज्य की विधायी प्रक्रिया में शून्यकाल नहीं होता. शून्यकाल वह समय है जब विधानसभा सदस्यों द्वारा अपने क्षेत्र या राज्य में हुई किसी घटना या अति आवश्यक मुद्दे की ओर सरकार का ध्यानाकर्षण किया जाता है. हिमाचल प्रदेश विधानसभा में इस प्रक्रिया को न अपनाते हुए यहाँ नियमों के माध्यम से सदस्य अपनी बात रखते. इन नियमों में 130, 62, 324 जैसे कई नियम शामिल है. सदन में किस दिन किस नियम के तहत बात रखी जाएगी यह पहले अध्यक्ष द्वारा तय कर दिया जाता है.
क्या होता है नियम 324-
ऐसे में आपको बता दें कि नियम 324 के तहत विधानसभा सदस्य सरकार को सुझाव देते है, आवश्यक मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित करते है एवं मंत्री भी इस नियम के तहत अपनी जवाबदेही या आश्वासन सदस्य को दे सकते है. इस नियम के तहत “बाल सत्र” में कार्यवाही करने का मकसद था की ज्यादा से ज्यादा बच्चे सदन के सभा पटल पर अपने सुझाव रख सके और उनकी समस्याएं समाज और सरकार तक पहुंचा सके, जिसमें बच्चे सफल भी रहे.
मुख्यमंत्री द्वारा की गयी घोषणा-
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर हुए इस विशेष बाल सत्र में मुख्य अतिथि के तौर पर हिमाचल के मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू मौजूद रहे. मुख्यमंत्री महोदय ने बच्चों द्वारा नियम 324 के माध्यम से उठाये गए मुद्दों को नीति निर्माण में लेने का आश्वासन सदन में दिया. इस सत्र की अध्यक्षता विधानसभा स्पीकर श्री कुलदीप सिंह पठानिया द्वारा की गयी.
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