कान्हा के जन्मोत्सव पर होते हैं विशेष आयोजन
गर्वित शर्मा
जयपुर : जन्माष्टमी का पर्व हिन्दू धर्म का खास पर्व है इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लिया था। इसलिए इस पर्व को कृष्ण जी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है | आज पूरे देश में इस त्यौहार को मनाया जा रहा है| माना जाता है कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर श्री कृष्ण का जन्म हुआ था| श्री कृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार भी माना जाता है। ये पर्व पूरे देश में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। जन्माष्टमी के पावन पर्व पर लोग पूरे दिन व्रत रखते हैं और कान्हा जी का जन्मदिन मनाते हैं। सभी मंदिरों में इस दिन 12 बजे भगवान श्री कृष्ण का जन्म करते हैं, इस दिन घरों में तरह-तरह के पंचामृत, पंजीरी, पाग, सिठौरा समेत कई पकवानों का भोग श्री कृष्ण को लगाया जाता है।श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दौरान कई जगहों पर भव्य मेलों का आयोजन किया जाता है। वृन्दावन, मथुरा, द्वारका, तेघरा (बिहार) आदि अनेक स्थानों पर बहुत ही शानदार मेले का आयोजन होता है। यह मेला कई दिनों तक चलता है और कई पंडाल बनाए जाते हैं और इनमें भगवान श्री कृष्ण के जीवन से जुड़ी घटनाओं को मूर्ति द्वारा झांकी स्वरुप बनाया जाता है। पूरा माहौल कृष्णमय हो जाता है। हर तरफ बस श्री कृष्ण के चरित्र का गुणगान किया जाता है। रास लीला में कृष्ण की लीलाओं को दिखाया जाता है।
जन्माष्टमी के पवित्र त्योहार पर दही -हांडी प्रतियोगिता के आयोजन करने की भी परंपरा है। इस प्रतियोगिता में सभी जगह के बाल गोविंदा भी हिस्सा लेते हैं। छाछ-दही आदि से भरी एक मटकी रस्सी की सहायता से मटकी को ऊपर लटका दिया जाता है और फिर बाल-गोविंदाओं द्वारा मटकी फोड़ने का प्रयास किया जाता है।इस प्रतियोगिता में शामिल होने वाले प्रतिभागी बड़ी-बड़ी मीनारें बनाकर इस मटकी को फोड़ते हैं और जो प्रतिभागी इस मटकी को फोड़ने में सफल होता है उसे विजेता घोषित किया जाता है। वहीं दही-हांडी प्रतियोगिता में विजेता टीम को इनाम देकर सम्मानित भी किया जाता है।
यह त्यौहार बच्चों के लिए भी ख़ास है| बच्चे श्री कृष्ण के जीवन से प्रेरणा ले सकते हैं| उनके सिद्धांतो, उनकी शिक्षाओं पर चलकर बच्चे अपने जीवन को उत्कृष्ट बना सकते हैं| इस दिन बच्चों में भी विशेष उत्साह देखने को मिलता है| डिजिटल बाल मेला के बच्चे भी इस दिवस पर आयोजित होने वाली प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं|
डिजिटल बाल मेला बच्चों के बीच जागरूकता पैदा करने और उनकी कला को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करने के लिए बच्चों द्वारा स्थापित एक मंच है। डिजिटल बाल मेला सूचना प्रौद्योगिकी की शक्ति का उपयोग करके बच्चों को उनके रचनात्मक पक्ष को उजागर करने में मदद कर रहा है और इसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है।
आपको बता दें कि डिजिटल बाल मेले की शुरुआत 2020 में जयपुर की रहने वाली 10 साल की जान्हवी शर्मा ने की थी। डिजिटल बाल मेला अब तक कई अभियान चला चुका है जिनमें “राजस्थान विधानसभा बाल सत्र”, “हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र”, “मैं भी बाल सरपंच” आदि शामिल हैं।
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