सदन के आखिरी सुझाव में उठा बाल श्रम का मुद्दा…

बाल श्रम

बाल विधायक सुमित ने भिक्षावृत्ति कर रहे बच्चों के लिए आश्रम का रखा प्रस्ताव….

आदित्य शर्मा.
शिमला. “विश्व बाल श्रम निषेध दिवस” पर आयोजित हुए विधानसभा “बाल सत्र” में बाल श्रम कर रहे बच्चों के हित में खील से बाल विधायक सुमित शर्मा ने आवाज़ उठाई.

 

हिमाचल प्रदेश के विधानसभा भवन में हुए इस विशेष “बाल सत्र” के आखिरी सुझाव और मुद्दे पर बात रखते हुए उन्होंने कहा कि-

आज “बाल श्रम निषेध दिवस” है, जो की मनाया है, उन बच्चों के लिए जिन्हें बहुत ही छोटी आयु से अपनी पढाई छोड़ काम पर जाना पड़ता है. आज के ज़माने में भी प्रदेश में गरीब बच्चों द्वारा भिक्षावृत्ति से लेकर ढाबों में कार्य करवाया जा रहा है। छोटे-छोटे बच्चों को उनकी बाल्यावस्था में शिक्षा और खेल-कूद से दूर क, उनसे खच्चर चलवाए जाते है, होटलों में बर्तन साफ़ कराये जाते है और बाल श्रम की समस्या राज्य में जाने-माने पर्यटक स्थलों पर और भी प्रबल है.

ऐसे में हमारी सरकार को “बाल श्रम” को रोकने हेतु, कड़े कानून बनाने चाहिए. साथ ही पहले से बने कानूनों की कड़ी पलना हेतु सरकार को सजग होना चाहिए. राज्य सरकार द्वारा गरीब बच्चों द्वारा की जा रही भिक्षावृत्ति को पूर्ण रूप से अंकुश लगाने की उचित कार्यवाही करें साथ ही ऐसे भिक्षावृत्ति करने वाले बच्चों के लिए राजकीय आश्रम का संचालन किया जाए जिसमें गरीब बच्चों को आवास, भोजन, पढाई इत्यादि सुविधाएं निशुल्क दी जाए।

डिजिटल बाल मेला की फाउंडर जान्हवी शर्मा ने बताया कि इस सत्र में मुख्य अतिथि के तौर पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू एवं विशिष्ट अतिथि के तौर पर राज्य सभा उप-सभापति श्री हरिवंश शामिल हुए. एच.पी विधानसभा स्पीकर श्री कुलदीप सिंह पठानिया की अध्यक्षता में आयोजित हुए इस ऐतिहासिक बाल सत्र में हिमाचल के कैबिनेट मंत्री समेत विधायक गण भी बच्चों को देखने व उनके मुद्दे जानने के लिए उपस्थित रहे.

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