हिमाचल की कशिश ने दी विश्व मानव अधिकार दिवस की जानकारी…

बाल लेखिका कशिश।

10 दिसंबर,1948 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानवाधिकारों की सार्वभौम घौषणा को अपनाया । मानवाधिकार दिवस को आधिकारिक तौर पर 4दिसंबर,1950 को संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान मान्यता दी गई थी।

संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार मानवाधिकार सार्वभौमिक है और निवास, लिंग, जातीयता, राष्ट्रीयता,रंग,भाषा,धर्म या अन्य स्थिति की परवाह किए विनासभ मनुष्यों पर लागू होते हैं।ये अधिकार परसपर संबंधित और अविभाज्य होते हैं।

मानवाधिकार दिवस भारत सरकार के लिए विशेष महत्व रखता है। क्योंकि भारत मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा के मूल हस्ताक्षरकर्ताओं में से एक है।

10 दिसंबर,2023 को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण प्रतिज्ञाओं में से एक “मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा की 75वी वर्षगांठ है। यह ऐतिहासिक दस्तावेज उन अहस्तांतरणनीय अधिकारों को स्थापित करता है, जिनका प्रत्येक व्यक्ति,जाती,रंग,धर्म,लिंग,भाषा,राजनीतिक या अन्य राज्य,राष्ट्रीय या सामाजिक मूल ,संपति, जन्म या अन्य स्थिति की परवाह किए बिना इंसान के रूप मे हकदार है।

मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा में कहा गया है” सभी मनुष्य स्वतंत्र पैदा हुए हैं और गरिमा और अधिकारों में समान है।वितर्क और विवेक से संपन्न है।उन्हें एक दूसरे के प्रति भाईचारे की भावना से काम करना चाहिए। यह घोषणापत्र 10दिसंबर ,1948 को पेरिस में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घौषित किया गया था और इसमें पहली बार मौलिक मानवाधिकारों को सार्वभौमिक रूप से सरंक्षित करने का प्रावधान किया गया था।

इस वर्ष मानवाधिकार दिवस 2023 का विषय या थीम है: “सभी के लिए स्वतंत्रता,समानता और न्याय “

डिजिटल बाल मेला ने दिसंबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

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