बाल लेखिका साक्षी।
दुनिया में लोगों के बीच हर समय अलग-अलग प्रकार की लड़ाई झगड़ा ,भेदभाव, जैसी अनेक समस्याएं होती है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए हर साल 20 फरवरी भारत में विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाया जाता है।
इस दिवस का उद्देश्य सामाजिक अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना है। शारीरिक भेदभाव, गरीबी, धार्मिक धार्मिक भेदभाव इत्यादि को खत्म करने के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय समुदायों को एग्जिट करना है।
सामाजिक न्याय सुरक्षित करता है कि सभी मनुष्यों के पास समान अधिकार और धन एक समाज के भीतर अवसर और विशेष अधिकार की पहुंचे हो,इसलिए यह दिवस मनाया जाता है।
26 नवंबर 2007 में अपने 62 में सत्र में संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने 20 फरवरी को विश्व सामाजिक न्याय दिवस के रूप में घोषित किया। पहली बार 20 फरवरी 2009 को यह दिवस मनाया गया था।
_विश्व सामाजिक न्याय दिवस सकारात्मक और नवीन ऊर्जाओं का प्रतीक है,ऐसी ऊर्जा जो समाज में न्याय कि स्थापना का जमा उठाती है_
डिजिटल बाल मेला ने फरवरी माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।
डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।
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