राजस्थान के पारस माली ने विश्व शिक्षक दिवस का समझाया महत्त्व…

यह दिन शिक्षकों के उनके छात्रों के लिए योगदान को याद करने और उन्हें सम्मान करने के लिए मनाया जाता है। 

बाल लेखक पारस माली।

वर्ल्ड टीचर्स डे, जिससे अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के रूप में भी जाना जाता है, हर साल 5 अक्टूबर को मनाया जाता है विश्व शिक्षक दिवस। यह दिन शिक्षकों के उनके छात्रों के लिए योगदान को याद करने और उन्हें सम्मान करने के लिए मनाया जाता है। इस दिन, कई लोग एक साथ आते हैं और वैश्विक स्तर पर शिक्षकों द्वारा महसूस की जा रही समस्याओं की पहचान कर और उन मुद्दों का सॉल्यूशन खोजने के लिए सेमिनार का आयोजन करते हैं।

क्यों चुना गया 5 अक्टूबर का दिन …

 5 अक्टूबर 1994 को यूनेस्को ने आई.एल.ओ की रिकमेंडेशन को मान्यता दी थी जिसकी बात इस दिन को विश्व शिक्षक दिवस के रूप में घोषित किया गया यह यूनेस्को द्वारा पेरिस में आयोजित इंटर गवर्नमेंट सम्मेलन का एक हिस्सा था। जिसने अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन आई एल ओ के सहयोग से शिक्षकों की स्थिति को मान्यता दी। इन रिकमेंडेशन को अपनाने के बाद संयुक्त राष्ट्रीय शैक्षिक , वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन यूनेस्को 5 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दे दी।

एक बार में फिर से आप सभी डिजिटल बाल मेला के बच्चों को अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देना चाहूंगा और आप सभी बच्चों को एक विशेष संदेश भी देना चाहूंगा कि ज्ञान से बड़ा कोई दान नहीं और गुरु से बड़ा कोई दानी नहीं। हमें हमेशा गुरु का सम्मान करना चाहिए और उनका हमेशा साथ देना चाहिए।

धन्यवाद।

डिजिटल बाल मेला बच्चों के बीच जागरूकता पैदा करने और उनकी कला को प्रदर्शित करने के लिए बच्चों द्वारा स्थापित एक मंच है।

डिजिटल बाल मेला ने सितंबर एवं अक्तूबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को उनकी फोटो के साथ डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

डिजिटल बाल मेला बच्चों के लिए अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता दिखाने का एक अभिनव मंच है। इसकी शुरुआत 2020 में जयपुर की 10 वर्षीय लड़की जान्हवी शर्मा ने की थी। डिजिटल बाल मेला ने अब तक कई अभियान चलाए हैं जिनमें “राजस्थान विधानसभा बाल सत्र”, “हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र”, “मैं भी” शामिल हैं। बाल सरपंच” आदि।

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