आदित्य शर्मा.
जयपुर. चुनाव भारतीय लोकतंत्र (Indian Democracy) का एक मुख्य हिस्सा. चुनावों की ही बदौलत भारतीय जनता एक सेवक को चुनती या नकारती है. भारतीय संविधान में कई प्रकार के जन-प्रतिनिधि (public Representative) मौजूद है और इन कई प्रकार के जन प्रतिनिधियों के भाग्य तय करने के लिए कई प्रकार के चुनाव भी. चाहें देश की सबसे निचली गद्दी पर बैठे सरपंच हो या देश की सबसे बड़ी गद्दी पर बैठे राष्ट्रपति (President) सभी को चुनावों (Election) की अग्नि परीक्षा से गुज़ारना ही पड़ता है.
इस ही अग्नि परीक्षा की एक कड़ी है आम चुनाव जिन्हें अंग्रेजी में General Election कहा जाता है. इन चुनावों का नाम जितना आम है भूमिका उतनी ही गंभीर. इस चुनाव का मकसद है भारत के सबसे मुख्य राजनीतिक किरदार का चुनाव, जी हाँ इस चुनाव के परिणाम तय करते है भारत के प्रधानमंत्री (Prime मिनिस्टर Election) का चेहरा. इन चुनावों का मकसद है लोकसभा का हिस्सा बनने वाले जन प्रतिनिधियों का चुनाव. कुल 550 सीटों के लिए यह चुनाव होते है.
आमतौर पर इन चुनावों का चक्र पांच सालों का होता है, पर भारत ने आम चुनाव पांच साल से पहले भी देखे है. भूगोल की बात करें तो यह चुनाव पूरे भारत में एक साथ कराये जाते है. गौरतलब है की इन चुनावों से जनता सांसद का चुनाव करती है, और जिस भी पार्टी के पास सबसे ज्यादा सांसद का समर्थन होता है वह पार्टी प्रधानमंत्री का. यह चुनाव इसीलिए मुख्य है क्योंकि केंद्र सरकार की कमान कौन संभालेगा यह इन चुनावों के परिणाम पर निर्भर करता है.
पाठक की जानकारी के लिए बता दें की आप यह लेख डिजिटल बाल मेला और राजस्थान शिक्षा विभाग द्वारा चलाये गए नए अभियान कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी? के तहत पढ़ रहे है. इस अभियान की शुरुआत के चलते बाल मेला “राष्ट्रीय मतदाता दिवस” 25 जनवरी “मतदाता जागरूकता सप्ताह” चला रहा है.
डिजिटल बाल मेला से जुड़ने के लिए दिए गए लिंक www.digitalbaalmela.com पर जाएँ या +918005915026 मोबाईल नंबर पर संपर्क करें|
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