छात्रों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दिया स्वच्छता और जिम्मेदारी का संदेश
वार्ड 53 स्थित विद्यालय के कक्षा 6 से 8 तक के 15 छात्रों ने ‘कौन बनेगा बाल पार्षद’ अभियान के अंतर्गत एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर समाज में स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सामूहिक जिम्मेदारी जैसे गंभीर विषयों को रोचक अंदाज़ में प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति में बच्चों ने अभिनय, संवाद और प्रतीकों के माध्यम से यह संदेश दिया कि स्वच्छता केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है।
नाटक में एक मोहल्ले की स्थिति को दिखाया गया, जहाँ लोग कूड़ा इधर-उधर फेंकते हैं, गंदगी फैलाते हैं और सफाई की गाड़ी आने के बावजूद सहयोग नहीं करते। छात्र संवादों और दृश्य माध्यम से यह दिखाते हैं कि यह लापरवाही कैसे समाज को बीमारियों और प्रदूषण की ओर ले जाती है। इसके समाधान के रूप में बच्चों ने ‘गीला-सूखा कचरा अलग करें’, ‘प्लास्टिक का प्रयोग बंद करें’ और ‘साफ-सफाई रखें’ जैसे व्यवहारिक उपायों को प्रस्तुत किया।
नाटक की अंतिम पंक्तियाँ – “अब तो जागो, नहीं तो शहर का क्या होगा?” – ने दर्शकों को सोचने और अपनी भूमिका पर आत्ममंथन करने के लिए मजबूर कर दिया।
इस प्रस्तुतिकरण में भाग लेने वाले छात्र हैं:
डृष्टि बाबेडिया (कक्षा 7), हर्ष बाबू गौतम, कुसुम धोबी, पुरव बैरवा, राखी मोडक, रमन प्रजापति, संजीता बर्मन, वंशिका तंवर, युवराज कुमार धनका, पवन सैनी (सभी कक्षा 6), अदिति जैन, दिव्या जीना, जानवी रावत, खुशी बदगुर्जर (कक्षा 7), और पलक (कक्षा 8)।
इस प्रेरणादायक नाटक को यूट्यूब पर निम्न लिंक पर देखा जा सकता है:
https://youtu.be/yLs9yRpNMYc
यह प्रस्तुति ना केवल बाल प्रतिभा की सशक्त अभिव्यक्ति है, बल्कि स्वच्छ भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुँचाने का सार्थक प्रयास भी है।

