कैसे पेड़ों को बचाने के लिए उनसे चिपक गए ग्रामीण
बाल लेखक पीयूष योगी|
एक समय में एक राजा हुआ करता था जिसका नाम राणा अभिजीत सिंह था| उनका राज 1730 में हुआ करता था|उनके नए महल के निर्माण के लिए लकड़ियां चाहिए थी| उन्होंने मंत्री को यह आदेश दिया कि मेरे नए महल के लिए लकड़ियां चाहिए| तभी मंत्री अपनी सेना को लेकर किले से 24 किलोमीटर दूर एक खेजडली नाम के गांव में पहुंचा| उसे गांव में लकड़ियां ज्यादा प्राप्त हो सकती थी इसलिए मंत्री ने वहां की लकडिया काटने का आदेश दिया | सैनिकों में से किसी ने कहा कि यहां के लोग जानवर एवं पेड़ों के रक्षक है यह हमें लकड़ियां नहीं काटने देंगे| यह सुनकर मंत्री को क्रोध आया और मंत्री ने आदेश दिया कि यहां के पेड़ काट दिए जाएं| जब गांव के बुजुर्गों ने समझाया कि हम पेड़ नहीं काटने देंगे तो मंत्री ने कहा कि यह कार्य जल्द से जल्द पूर्ण हो| जब मंत्री ने गांव वालों की बात नहीं मानी तो गांव वाले पेड़ों से चिपक गए और मंत्री ने उन्हें कटवा दिया। इस दिवस को यादगार बनाने के लिए हम इसे 12 सितम्बर को खेजडली शहीद दिवस के नाम से जानते हैं | खेजडली शहीद दिवस हमें प्रकृति की रक्षा करने और पेड़ों को बचाने के लिए शहीद हुए वीरों की याद दिलाता है|
डिजिटल बाल मेला बच्चों को यह शिक्षा देता है की वह भी प्रकृति से प्रेम करें| इसके साथ ही बच्चों से अपील करता है कि बच्चे प्रकृति की रक्षा करने के लिए हर संभव प्रयास करें| डिजिटल बाल मेला एक ऐसा मंच है जो बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए निरंतर कार्य कर रहा है| इसके लिए डिजिटल बाल मेला कई अभियानों का आयोजन कर चुका है| अपने बच्चे को डिजिटल बाल मेला से जोड़ने के लिए आप 8005915026 पर संपर्क करें|
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