शिवाक्ष शर्मा।
भारत में हर साल 9 नवंबर को राष्ट्रीय कानूनी सेवा दिवस मनाया जाता है। यह कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 को अपनाने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
इस अधिनियम को 1994 के संशोधन अधिनियम के बाद 9 नवंबर 1995 में लागू किया गया।
राष्ट्रीय कानूनी सेवा दिवस की स्थापना के बाद, राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) की स्थापना की गयी।
राष्ट्रीय कानूनी सेवा दिवस सेवा दिवस की स्थापना महिलाओं, अनुसूचित जनजातियों, विकलांग लोगों, अनुसूचित जातियों, प्राकृतिक आपदा पीड़ितों और मानव तस्करी पीड़ितों की सहायता और सहायता के लिए की गई थी।
हाशिए पर रहने वाले समुदायों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लोगों को अक्सर कानूनी जानकारी बहुत कम या बिल्कुल नहीं होती है। राष्ट्रीय कानूनी सेवा दिवस पर, ऐसे लोगों को उनके अधिकारों और मुफ्त कानूनी सेवाओं के बारे में शिक्षित किया जाता है जिनका वे लाभ उठा सकते हैं। न्याय को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाना भी इसमें शामिल है। हर वर्ग के लोगों को हर धर्म के लोगों को निष्पक्ष न्याय प्रदान करना और किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव न हो, इन सबको लेकिन लोगों को जागरूक किया जाता है।
डिजिटल बाल मेला बच्चों के बीच जागरूकता पैदा करने और उनकी कला को प्रदर्शित करने के लिए बच्चों द्वारा स्थापित एक मंच है।
डिजिटल बाल मेला ने नवंबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।
डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।
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