जानिए हनुमानगढ़ के पारस माली से विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस के बारे में…

जानिए हनुमानगढ़ के पारस माली से विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस के बारे में।

 

पारस माली।

 

हर साल दुनियाभर में 26 सितंबर को विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य है, लोगों में पर्यावरणीय स्वास्थ्य के प्रभाव के बारे में जागरूकता पैदा करना। हम सभी जानते हैं कि स्वस्थ रहने के लिए पर्यावरण को बचाना कितना जरूरी है। जिस जगह हम रहते हैं, वहां पर्यावरण से जुड़ी हर चीज का देखभाल करना हर व्यक्ति का फर्ज होना चाहिए। हर बीमारी का उपचार प्रकृति में है। इन्हीं चीजों के महत्व को समझाने के लिए विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।

मनुष्य की बिगड़ती सेहत का सबसे बड़ा कारण प्रकृति के प्रति लापरवाही है। ग्लोबल वार्मिंग, वनों की कटाई, नदियों में गंदगी फैलाना, पशुओं को हानि पहुंचाना आदि पर्यावरणीय स्वास्थ्य के नुकसान पहुंचाने के कई कारण हैं।

पर्यावरणीय स्वास्थ्य सार्वजनिक स्वास्थ्य की वह शाखा है जो लोगों और उनके पर्यावरण के बीच स्वास्थ्य संबंधी अंतर्संबंधों पर ध्यान केंद्रित करती है। यह निर्मित और प्राकृतिक दोनों तरह के सुरक्षित और स्वास्थ्यप्रद वातावरण को बढ़ावा देकर मानव स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देता है। इस अनुशासन में अक्सर जलवायु परिवर्तन शमन, खतरनाक सामग्री प्रबंधन, भूमि उपयोग योजना, रेडियोलॉजिकल स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, जहरीले रासायनिक जोखिम, मनोरंजक जल बीमारी की रोकथाम, सुरक्षित पेयजल, और बहुत कुछ जैसे क्षेत्रों में काम शामिल होता है। पर्यावरणीय स्वास्थ्य पेशेवर अक्सर महामारी विज्ञानियों, विष विज्ञानियों, स्वच्छताविदों, औद्योगिक स्वच्छताविदों और विषय वस्तु विशेषज्ञों के रूप में काम करते हैं।

विश्व पर्यावरणीय स्वास्थ्य दिवस का इतिहास।

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ एनवायर्नमेंटल हेल्थ द्वारा विश्व पर्यावरणीय स्वास्थ्य दिवस मनाने की घोषणा 26 सितंबर 2011 में किया गया था, ताकि लोग पर्यावरणीय स्वास्थ्य को लेकर जागरूक हों। IFEH पर्यावरणीय स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए लंबे समय से काम कर रहा है। हर साल विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस इसलिए मनाया जाता है ताकि लोग वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाएं।

विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस का महत्व
मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच गहरा संबंध है। पर्यावरण के कारण मनुष्यों की सेहत पर कैसे प्रभाव पड़ता है, लोगों को इस बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए यह दिन मनाया जाता है। कई जगहों पर कार्यक्रम किया जाता है, जिससे लोग पर्यावरण स्वास्थ्य के महत्व को आसानी से समझ सकें। इसके लिए वर्क शॉप भी करवाई जाती है।

यह डिजिटल बाल मेला द्वारा बच्चों की लेखन क्षमता बढ़ाने के लिए आयोजित प्रतियोगिता है। इसमें हर महीने बेहतरीन आर्टिकल भेजने वाले बच्चे को ‘राइटर ऑफ दी मंथ’ के खिताब से नवाज़ा जाता है एवं विजेता को ₹1100 की राशि प्रदान की जाती है। हम ये प्रतियोगिता हर महीने आयोजित करते हैं, आपको किन-किन विषयों पर आर्टिकल लिखने हैं इसकी जानकारी डिजिटल बाल मेला द्वारा हर महीने के अंत में दी जाती है। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाता है।
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