पिछड़े तबके की समस्याओं को सुलझाने के लिए हैं मशहूर
शिवाक्ष शर्मा
चंद्र कुमार का जन्म 8 मई, 1944 को जिला कांगड़ा के जवाली में हुआ था. चंद्र कुमार ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और पंजाब विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है. चौधरी चंद्र कुमार के बेटे नीरज भारती भी साल 2012 में इसी सीट से विधायक रह चुके हैं. चौधरी चंद्र कुमार को पिछड़े तबकों की समस्याओं को सुलझाने और उनके उत्थान के लिए जाना जाता है. चौधरी चंद्र कुमार ने अपने जीवन की शुरुआत बतौर शिक्षक की थी. वह शिमला के मशहूर सेंट बीड्स कॉलेज में भूगोल के शिक्षक रहे हैं.
साल 1977 में चौधरी चंद्र कुमार पहली बार विधायक के तौर पर चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद चौधरी चंद्र कुमार ने साल 1982 और साल 1985 में बतौर विधायक जीत हासिल की. साल 1990 के चुनाव में चौधरी चंद्र कुमार को एक बार फिर हार का मुंह देखना पड़ा, लेकिन चंद्र कुमार ने वापसी करते हुए साल 1993, साल 1998 और साल 2003 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की.
कैबिनेट मंत्री चंद्र कुमार 1982 से 1985 तक हिमाचल पथ परिवहन निगम के उपाध्यक्ष भी रहे हैं. साल 1984-85 में चंद्र कुमार उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य के उप मंत्री भी रह चुके हैं. उन्होंने साल 1985 से साल 1989 तक राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के तौर कर काम किया है. साल 1989-90 में विभाग बदलकर उन्हें बागवानी कृषि और भाषा एवं संस्कृति विभाग के साथ का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया. साल 1993 में वह पहली बार कैबिनेट मंत्री बने और उन्हें आईपीएच के साथ तकनीकी शिक्षा के मंत्री का दायित्व सौंपा गया. चौधरी चंद्र कुमार इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री रामलाल ठाकुर और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ काम कर चुके हैं. वे अकेले ऐसे कैबिनेट मंत्री हैं, जिनके पास प्रदेश के तीन मुख्यमंत्रियों के साथ काम करने का अनुभव है. साल 2004 में चौधरी चंद्र कुमार ने कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से सांसद के तौर पर भी जीत हासिल की थी. 2023 में उन्हें पशुपालन विभाग एवं कृषि मंत्री का कार्यभार सौंपा गया।
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