जानिए विश्व मधुमेह दिवस के बारे में…

जानिए विश्व मधुमेह दिवस के बारे में।

 

शिवाक्ष शर्मा।

 

 

विश्व मधुमेह दिवस हर साल 14 नवंबर को आयोजित होने वाले सबसे बड़े मधुमेह जागरूकता अभियानों में से एक है, जो 160 से अधिक देशों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है और अपने जागरूकता अभियानों, उपचार तक बेहतर पहुंच की वकालत और मधुमेह से निपटने के लिए गुणवत्तापूर्ण सूचनात्मक सामग्री के माध्यम से 100 करोड़ से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है। डॉक्टर बताते हैं, भले ही दुनियाभर में सबसे ज्यादा मरीज टाइप-2 डायबिटीज के देखे जाते रहे हैं पर मधुमेह चार प्रकार का होता है। इसे उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी समझना या युवावस्था में शुगर की समस्या को अनदेखा करना आपके लिए दिक्कतें बढ़ाने वाला हो सकती है। बढ़े रहने वाले शुगर लेवल का असर हृदय और आंखों की सेहत पर भी पड़ सकता है, इसलिए डायबिटीज को हल्के में लेने की भूल नहीं की जानी चाहिए। डायबिटीज के जोखिम कारकों के बारे में जानना और सभी लोगों को इससे बचाव के लिए प्रयास करते रहना बहुत जरूरी है।
डायबिटीज का सबसे बड़ा कारक फैमिली हिस्ट्री को माना जाता है। यानी कि यदि माता-पिता या भाई-बहन को टाइप-2 डायबिटीज है तो आपको भी मधुमेह होने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि डायबिटीज के अन्य प्रकार जैसे टाइप-1 या फिर गर्भकालीन मधुमेह में इसका जोखिम कम होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं जिन लोगों को डायबिटीज की फैमिली हिस्ट्री रही है उन्हें निरंतर और विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
एक डेटा के अनुसार साल 2021 में 20-79 वर्ष के 537 मिलियन (53.7 करोड़) वयस्क मधुमेह से पीड़ित थे, यानी कि हर 10 में एक व्यक्ति को ये बीमारी थी। समय के साथ ये समस्या और भी बढ़ती जा रही है, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि डायबिटीज रोगियों की संख्या 2030 तक 643 मिलियन (64.3 करोड़) और 2045 तक 783 मिलियन (78.3 करोड़) तक हो सकती है। भारत में डायबिटीज के जोखिमों को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक रिपोर्ट में बताया कि देश में 50% से ज्यादा लोगों को अपनी मधुमेह की स्थिति के बारे में पता ही नहीं है। अगर समय रहते इसका निदान न किया जाए और इलाज न हो पाए तो स्वास्थ्य संबंधी कई गंभीर जटिलताएं विकसित हो सकती हैं।
इस साल विश्व मधुमेह दिवस की थीम है- ‘बाधाओं को तोड़ना, अंतरालों को पाटना’. यह मधुमेह जैसी घातक बीमारियों के जोखिम को कम करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है. इस थीम का आशय यह सुनिश्चित करना है कि डायबिटीज से पीड़ित सभी लोगों तक न्यायसंगत, व्यापक, किफायती और गुणवत्तापूर्ण उपचार आसानी से पहुंच सके.

यह डिजिटल बाल मेला द्वारा बच्चों की लेखन क्षमता बढ़ाने के लिए आयोजित प्रतियोगिता है। इसमें हर महीने बेहतरीन आर्टिकल भेजने वाले बच्चे को ‘राइटर ऑफ दी मंथ’ के खिताब से नवाज़ा जाता है एवं विजेता को ₹1100 की राशि प्रदान की जाती है। हम ये प्रतियोगिता हर महीने आयोजित करते हैं, आपको किन-किन विषयों पर आर्टिकल लिखने हैं इसकी जानकारी डिजिटल बाल मेला द्वारा हर महीने के अंत में दी जाती है। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाता है।
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