कुमार मनीष ने डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौती पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा—
“इंटरनेट जानकारी देता है, लेकिन सत्यता डिजिटल साक्षरता से आती है।”
उन्होंने बताया कि एआई आधारित स्वास्थ्य सामग्री अक्सर ‘विश्वसनीय लगती है पर सही नहीं होती।’
उन्होंने सुझाव दिया कि—
* छात्रों को डिजिटल हेल्थ टूल्स की मुफ्त सदस्यता दी जाए,
* पत्रकारों को नियमित डिजिटल फैक्ट-चेकिंग प्रशिक्षण मिले।
कुमार मनीष — एआई, डिजिटल साक्षरता और misinformation

