हिमाचल प्रदेश के अर्पित ने दी शून्य भेदभाव दिवस की जानकारी।
बाल लेखक अर्पित।
शून्य भेदभाव दिवस को सर्वप्रथम 1 मार्च 2014 में मनाया गया था। इस दिवस को मनाने का विचार यूएनएड्स के डायेरक्टर मिशेल सिदीबे द्वारा दिया गया है था और दिसंबर 2013 को इस दिवस को बनाया गया था और उसी साल इसी नाम यानी शून्य भेदभाव के नाम से एक अभियान की शुरुआत की गई थी। ये अभियान उस समय एक प्रमुख कार्यक्रम बना जिसमें 30 से अधिक से व्यापारियों और नेताओं ने भेदभाव को खत्म करने के लिए संकल्प लिया। इस दिवस को विश्व एड्स दिवस से प्रेरित होकर बनाया गया है। ताकि एचआईवी/एड्स के साथ रह रहे लोगों के प्रति अनुचित व्यवहार को खत्म किया जा सकें। इस दिवस के माध्यम से रंग, धर्म, रष्ट्रीयता, जाति, लिंग, विकलांगता, कद आदि के कारण हो रहे भेदभावों की रोकथाम के लिए मनाया जाता है।
हर साल शून्य भेदभाव दिवस को हर साल एक नई थीम के साथ मनाया जाता है। इस साल यानी 2023 में शून्य भेदभाव दिवस को “सेव लाइव्स: डिक्रिमिनलाइज़ करें” की थीम के साथ मनाया जा रहा है। जिसके माध्यम से एचआईवी के साथ रहने वाले मरीजों के प्रति हो रहे भेदभाव को रोकना है
डिजिटल बाल मेला ने मार्च माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।
डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।
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