जानें- “धार्मिक राजनीति” करने पर क्या बोले “बाल सत्र” के अध्यक्ष लविश नेगी…
आदित्य शर्मा.
शिमला. डिजिटल बाल मेला द्वारा आयोजित हिमाचल प्रदेश विधानसभा “बाल सत्र” में प्रश्नकाल की कार्यवाही के दौरान विपक्ष द्वारा धार्मिक राजनीति करने पर बाल स्पीकर लविश नेगी भड़क उठे. यह मौका था जब प्रश्नकाल के माध्यम से विपक्ष की सदस्य एवं लाहौल एवं स्पीति से बाल विधायक सोनम युदौन ने हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा कला एवं संस्कृति को बचाने के लिए क्या प्रयासों पर प्रश्न खड़ा किया.
अपने प्रश्न के खंड 2 में उन्होंने पूछा कि प्रदेश के प्रमुख एवं ऐतिहासिक मंदिरों तक पहुँचने वाली सड़कों की हालत बहुत ही खस्ता है, जिसके कारण हजारों की संख्या में रोज़ आने वाले श्रधालुओं को अनेकों तकलीफों का सामना करना पड़ता है? क्या ऐसे में सरकार इन सड़कों की मरम्मत का कोई विचार रखती है अगर हाँ तो कब तक और नहीं तो क्यों?
इसका जवाब पर्यटन एवं कला संस्कृति मंत्री एवं ज्वालामुखी से बाल विधायक दिव्यांशी शर्मा ने दिया और बताया कि प्रदेश की कला एवं संस्कृति के संरक्षण हेतु सरकार ने हाल ही में शिमला समर फेस्ट का आयोजन किया गया है. इसी के साथ प्रदेश सरकार राज्य के प्रमुख नृत्य “नाटी” के संरक्षण एवं इसके प्रोत्साहन हेतु समय-समय पर आयोजन करती रहती है. उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में कला एवं संस्कृति को संजोए रखने के लिए संग्रहालय भी मौजूद है.
प्रश्न 6 के खंड 2 में पूछें गए सवाल का उत्तर देते हुए बाल मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि प्रदेश सरकार प्रमुख एवं ऐतिहासिक मंदिर जो प्रदेश की संस्कृति का भी प्रतीक है, इन तक पहुँचने वाली सड़कों के मरम्मत हेतु विचार रखती है एवं इन मंदिरों में श्रधालुओं की आवाजाही के कारण इस प्रक्रिया को सरकार द्वारा रोका गया है. जब इन जगहों पर भीड़ कम होगी तब जाकर सरकार द्वारा तय विभाग इस कार्य को पूर्ण करेगा.
इस पर विपक्ष के विधायक एवं चंबा से चयनित प्रत्याशी शुभम अपने स्थान पर बैठे-बैठे ही मंत्री जी पर धार्मिक टिप्पणी करने लगे. इसके चलते इस विशेष बाल सत्र के अध्यक्ष लविश नेगी भड़क उठे और उन पर सदन द्वारा सख्त कार्यवाही करने की चेतावनी दी. इतना ही नहीं अध्यक्ष ने यह भी कहा की सदन धार्मिक राजनीति की जगह नहीं है, यह सभी धर्मों के लिए सामान है.
डिजिटल बाल मेला कि जान्हवी शर्मा ने बताया कि इस ऐतिहासिक बाल सत्र के दौरान हुई कार्यवाही में प्रश्नकाल और नियम 324 शामिल है. इसमें प्रश्नकाल में सरकार से 10 सवाल किये गए वहीं प्रक्रिया 324 के तहत 21 सुझाव या मांगें सरकार के सामने रखी गयी.
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