पढ़िए बिहार के कार्तिक द्वारा लिखी रोचक कहानी।

आज तुम्हें अपने माता-पिता की बात ताने लग रहे हैं तो कल लोगों के ताने सुनने के लिए तैयार रहो …

 

बाल लेखक कार्तिक।

एक शहर के एक छोटे से गांव में रोहित नाम का बच्चा रहता था। रोहित 8 साल का बच्चा था ।वह बहुत बदमाश था। उसके पिता एक शिक्षक थे ।रोहित के चार दोस्त थे जिनके साथ पढ़ाई छोड़कर घूमते रहता था ।इसके माता-पिता को कुछ समझ नहीं आ रहा था। इसके माता-पिता इसको रोज समझाते लेकिन रोहित को अपने माता-पिता की बात ताने के जैसे लग रही थी। रोहित रोज अपने विद्यालय ना जाकर अपने दोस्तों के साथ घूमता रहता उसके पिता उसको रोज समझाते लेकिन उसे समझ नहीं आता ऐसे ही कुछ साल बीत गए ।रोहित माता-पिता की बात ना मन कर कहीं चल जाता रोज वह अपने घर आता उसके माता-पिता रोज उसको समझते लेकिन रोहित को उनके बात सुनने की आदत हो गई थी ।वह सुनकर अपने कमरे के अंदर चला जाता। ना वह विद्यालय जाता ना ही कोचिंग ना पढ़ाई करता ऐसे ही समय बीतता जा रहा था। वह बड़ा हो रहा था वह अब 10 साल का हो चुका था। लेकिन तब भी वह अपनी आदत से तंग नहीं आया था ।वह अब बड़े लोग के साथ उठना बैठना चालू करने लगा किसी व्यक्ति को कुछ बोलते रहता ।वे लोग रोज उसके माता-पिता को बोलते लेकिन जब रोहित घर आता तो अपने पिता की ना सुनकर अपने कमरे में सोने चला जाता ।ऐसे ही किसी से झगड़ा कर लेता किसी को कुछ बोल देता ।अब गलत गलत आदतें सीखने लगा था। एक दिन वह लोगों के बीच बैठने जाता उसमें से एक व्यक्ति ने रोहित को बोला ना तुम पढ़े लिखे हो ना तुम्हें बोलने का ढंग है और भी ताने मारने लगा ।फिर रोहित दूसरे दिन भी लोगों के साथ बैठने जाता फिर वे लोग रोहित को ताने मारते तब उसे समझ आया मेरे माता-पिता मुझे सही राह दिखते थे। लेकिन मैं उसे देखना ही नहीं चाहता था ।अब उसे अपनी माता-पिता की बात अच्छे लगने लगी। वह घर जाता है और अपने माता-पिता से बोलता है ।मुझे माफ कर दीजिए मुझसे गलती हो गई आप लोग जो बात बोलते थे वह मैं समझ ही नहीं पा रहा था। अब वह बोलता है मैं अब पढ़ूंगा और एक अच्छा अफसर बन कर दिखाऊंगा। रोहित यह बोलकर अपने कमरे में चला गया ।और दूसरे दिन से वह दिन भर अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने लगा ।साल बीतते गए 1 दिन वह एक अच्छा अफसर बन जाता है। वह अपने माता-पिता का जाकर बोलता है कि मैं आज आप ही लोग के वजह से यह अफसर हूं ।और प्रणाम करता।

विशेष:- आज तुम्हें माता-पिता की बात बुरी लग रही है तो कल लोगों के ताने सुनने के लिए तैयार रहिए।

कार्तिक।

डिजिटल बाल मेला ने जनवरी माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

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