“संग्रहालयों की कहानी, बच्चों की जुबानी” प्रदर्शनी का हुआ समापन
जयपुर। पर्यटन आयुक्त रुक्मणि रियाड़ ने कहा कि राज्य सरकार बच्चों की रचनात्मकता को आगे बढ़ाने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। बच्चों को उनकी धरोहर से जोड़ना बहुत जरूरी है। हमारे संग्रहालय केवल अतीत का संकलन नहीं है, बल्कि प्रेरणा और सीखने के जीवित स्रोत हैं। यह बात उन्होंने शुक्रवार को जवाहर कला केंद्र के सुदर्शन आर्ट दीर्घा में आयोजित “संग्रहालयों की कहानी, बच्चों की जुबानी” प्रदर्शनी के समापन समारोह के दौरान कही। उन्होंने कहा कि हमें ऐसी पहल लगातार करनी होगी, जिससे बच्चों में इतिहास के प्रति रूचि जगे।
रियाड़ ने कहा कि राजस्थान अपनी कला और संस्कृति की धरोहर के लिए विश्वभर में जाना जाता है। साथ ही बच्चों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए इसे सांस्कृतिक धरोहर को नई दृष्टि से देखने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के अभियान से बच्चों की प्रतिभा निखरकर सामने आती है। बच्चों को समाज और संस्कृति की गहराई से जोड़े रखने का काम करती है। डिजिटल बाल मेला की संस्थापक जान्हवी शर्मा ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से सुदर्शन आर्ट गैलरी बच्चों की कल्पनाशक्ति और रंगों से महक रही थी। यहां नन्हे कलाकारों ने अपनी पेंटिंग्स के माध्यम से विश्व के धरोहर स्थलों और संग्रहालयों को नई दृष्टि से प्रस्तुत किया। समापन समारोह में प्रतिभागी बच्चों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए और अभियान का विशेष पोस्टर जारी किया गया। फ्यूचर सोसायटी की उपाध्यक्ष रविता शर्मा ने बताया कि आगामी दिनों में यह प्रदर्शनी प्रदेश के अन्य पर्यटक स्थलों पर आयोजित की जाएगी।

