जवाहरलाल नेहरू के समय भारत में पंचायती ढाँचा

Jawahar Lal Nehru implementing Panchayati Raj in Rajasthan

तनय मिश्रा।

भारत में पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी। आज के इस परिवेश में मन में यह सवाल आना लाज़िमी है कि उस समय पंचायत का ढाँचा कैसा था?

जयपुर। भारत का एक बड़ा भाग ग्रामीण क्षेत्र में आता है। ऐसे में गाँवों में शासन व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए देश में पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत की गई। आधुनिक भारत में राजस्थान में पंचायती राज व्यवस्था सर्वप्रथम लागू की गई थी। 2 अक्टूबर 1959 को देश के प्रथम और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने नागौर के बगधरी गाँव में सबसे पहले पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत की थी। पर क्या आपने सोचा है कि उस समय देश में पंचायत का ढाँचा कैसा था? आइए इसपर एक नज़र डाले।

जवाहरलाल नेहरू के समय पंचायती ढाँचा

2 अक्टूबर 1959 को देश में पहली बार पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत हुई। आज़ादी के कुछ समय बाद इस इस बात पर गौर किया गया कि पूरे देश का शासन सही प्रकार से चलाने में सिर्फ केंद्र सरकार या सिर्फ राज्य सरकार सक्षम नहीं हो सकती है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर भी प्रशासनिक व्यवस्था को जरूरी माना गया। कई प्रदेशों में जनसंख्या और क्षेत्रफल अधिक होने के कारण प्रदेश के सबसे ऊंचे पद पर पर बैठे व्यक्ति को ग्रामीण इलाकों के लोगों की समस्याओं के बारे में पता नहीं चल पाता था। ऐसे में देश में लोकतंत्र की जड़ों को पेड़ की जड़ों की तरह फैलाने का फैसला लिया गया। इस काम के लिए बलवंत राय मेहता की अध्यक्षता में 1957 में एक समिति का गठन किया गया था, जिसकी सिफ़ारिश में जनतांत्रिक विकेंद्रीकरण की बात की गई। इसे ही पंचायती राज कहा गया। पंचायती राज में त्रिस्तरीय ढांचे की स्थापना की गई। गाँव के स्तर पर ग्राम सभा, ब्लॉक स्तर पर मंडल परिषद/पंचायत समिति और जिला स्तर पर जिला परिषद/जिला पंचायत होता है और इन तीनों स्तरों के सदस्यों का निर्वाचन चुनाव के द्वारा होता है। ये सदस्य ही जमीनी स्तर पर शासन की बागडोर संभालते हैं। राजस्थान में पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत के बाद राजस्थान पंचायत समिति और जिला परिषद एक्ट 1959 के तहत देश में पंचायतों के पहले चुनाव भी सितंबर-अक्टूबर 1959 में हुए थे।

यह भी पढ़ें :- मैं भी बाल सरपंच: राजस्थान के सरपंचों ने किया “बाल मित्र” पंचायत बनाने का वादा

डिजिटल बाल मेला के अनूठे अभियान “मैं भी बाल सरपंच” के ज़रिए देश के ग्रामीण और पंचायती क्षेत्र के बच्चों को पंचायती राज प्रणाली के प्रति जागरूक करने का कार्य किया जाता है। इस अभियान के तहत डिजिटल बाल मेला ऑनलाइन और ऑफलाइन सत्र करता है, जिनमें राज्य के दिग्गज नेता बच्चों से पंचायती राज प्रणाली पर संवाद भी करेंगे। इन बच्चों को राजस्थान के गाँव, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और विद्यालयों के माध्यम से जोड़ा जाएगा। इस अभियान में कई तरह के सत्र, वीडियो एंट्री, क्विज़ और डिबेट प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाती हैं। इससे पहले डिजिटल बाल मेला “शेड्स ऑफ कोविड” पेंटिंग प्रदर्शनी का भी आयोजन कर चुका है।

यह भी पढ़ें :- बच्चे समझें पंचायत व्यवस्था को, इन सवालों के जवाब देकर

अगर आपका बच्चा भी “मैं भी बाल सरपंच” अभियान से जुड़ना चाहता है, तो आप डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट www.digitalbaalmela.com पर रजिस्टर कर सकते हैं या इस नंबर 8005915026 पर वॉट्सऐप/टेलीग्राम के ज़रिए भी रजिस्टर कर सकते हैं। जानकारी के लिए डिजिटल बाल मेला के सोशल मीडिया हैंडल्स फॉलो करें…….

फेसबुक – https://www.fb.com/digitalbaalmela/

इंस्टाग्राम – https://instagram.com/digitalbaalmela

ट्विटर – https://twitter.com/DigitalBaalMela

यूट्यूब – 

 

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *