राजस्थान के पारस माली ने दी गोवा मुक्ति दिवस की जानकारी।  

बताया इस दिवस के इतिहास के बारे में।

बाल लेखक पारस माली।

भारत में प्रतिवर्ष गोवा मुक्ति दिवस 19 दिसंबर को मनाया जाता है। यह उस दिन का प्रतीक है जब 1961 में पुर्तगाल के 450 वर्षों के शासन के बाद भारत के सशास्त्र बलों ने गोवा को मुक्त कराया था। गोवा मुक्ति दिवस को गोवा में विभिन्न प्रकार के आयोजन और कार्यक्रम होती है। इन आयोजन और कार्यक्रम में लोगों को गोवा मुक्ति दिवस का इतिहास और महत्व समझाया जाता है। गोवा में एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम भी होता है जिसमें गोवा के सभी लोग आते हैं और अपने इतिहास और गोवा मुक्ति दिवस के महत्व को समझते हैं।

गोवा मुक्ति दिवस का इतिहास।

 पुर्तगालियों ने 1510 में भारत में कई हिस्सों में अपना शासन स्थापित किया था लेकिन 19वीं सदी के अंत तक भारत में पुर्तगाली शासन केवल गोवा, दमन दीव, दादरा नगर हवेली तक ही इनका शासन रह गया था। उसके बाद गोवा मुक्ति आंदोलन चला जिसने गोवा में पुर्तगाली का शासन विरोध कर खत्म कर दिया। 15 अगस्त 1947 को जब भारत को स्वतंत्रता मिली तब भी गोवा में पुर्तगाली शासन था इसके बाद पुर्तगालियों ने गोवा और अन्य भारतीय क्षेत्र से अपनी पकड़ छोड़ने से इनकार कर दिया था। पुर्तगालियों के साथ असफल वार्ता और गोवा को मुक्त बनाने के लिए कई प्रयास किया उसके बाद 18 दिसंबर 1961 से 36 घंटे तक ऑपरेशन विजय चलाया गया। जिसमें भारतीय नौसेना भारतीय, वायु सेना और भारतीय सेना के हमले शामिल थे उसके बाद 19 दिसंबर को गोवा को मुक्ति मिल गई।

अंत में मैं कहना चाहूंगा आप सभी को गोवा मुक्ति दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

डिजिटल बाल मेला ने दिसंबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

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