संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए मीडिया कार्यशाला आज 

जेंडर समानता खबरों में सुनिश्चित करने के लिए दिया जाएगा विशेषज्ञ द्वारा प्रशिक्षण 

जोधपुर। यूनिसेफ़ एवं फ्यूचर सोसाइटी की नई पहल “जेंडर सेंसिटिव राजस्थान” का अगला सत्र 20 दिसम्बर को सूर्यनगरी जोधपुर में होगा। ये एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आरटीडीसी होटल घूमर (ओल्ड हाई कोर्ट रोड़) में प्रातः 10 बजे से आयोजित होगी जिसमें मीडिया जगत के दिग्गज शामिल होंगे। प्रिंट मीडिया से लेकर टीवी और डिजिटल के विभिन्न संस्थानों में कार्य करने वाले पत्रकारों के लिये आयोजित की जाने वाली इस एक दिवसीय वर्कशॉप में वरिष्ठ जेंडर विषय विशेषज्ञ और शिक्षाविद् नसीरुद्दीन द्वारा तैयार किए गए ट्रेनिंग मॉड्यूल के जरिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्देश्य है मीडिया के माध्यम से समाज में लैंगिक असमानता को दूर करने का प्रयास करना। महिला अधिकारों, महिला समानता, महिलाओं के मुद्दें समाज के सामने रखना। और ये सुनिश्चित करना कि पत्रकार सक्रिय भूमिका कैसे निभा सकते है व समाज के सर्वांगीण विकास के लिए इन मुद्दों को सामने लाना क्यों जरूरी है।

यूनिसेफ के संचार विशेषज्ञ अंकुश सिंह ने बताया कि परंपरागत और न्यू मीडिया दोनों माध्यमों में ही महिलाओं से जुड़े पक्षों को उजागर करना जरूरी है। इस विषय पर पत्रकारों का समाज से निरंतर संपर्क रहता है, ऐसे में बच्चों, अभिभावकों एवं शिक्षकों को “लैंगिक संवेदनशील” बनाने में उनकी भूमिका बढ़ाई जा सकती है।

द फ्यूचर सोसाइटी की उपाध्यक्ष रविता शर्मा ने बताया कि इस एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन “जेंडर सेंसिटिव राजस्थान” अभियान के तहत किया जा रहा हैं। इसकी शुरूआत इन्दिरा गांधी पंचायती राज भवन, जयपुर में 02 नवम्बर को हुई थी जिसमें मुख्य अतिथि पीबीआई की सहायक महानिदेशक ऋतु शुक्ला थी। जोधपुर के बाद अलवर और दुसरे संभागों में भी मीडिया के वरिष्ठ लोगों के साथ फिल्ड विजिट, प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सभी सत्रों में मीडिया के माध्यम से इस विषय पर समाज को साथ लेने के प्रयासों पर चर्चा होगी।

कार्यशाला में भाग लेने वाले पत्रकारों के सुझावों के लिये एक फ़ीडबैक फार्म भी होगा। जिससे पत्रकारों को इस मुद्दे पर सामने आने वाली सामाजिक सोच का अध्ययन किया जा सके।

 

डिजिटल बाल मेला ने दिसंबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

 

डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

 

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