“हिंदी भाषा अंतर्राष्ट्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त करने की राह पर” – यथार्थ

सोलन के यथार्थ टकोलर ने हिंदी दिवस पर रखी अपनी बात। 

बाल लेखक यथार्थ। 

हिंदी हमारी राजभाषा है। यह भाषा भारतीयों की पहचान है। हिंदी भाषा अपनी जननी संस्कृत से आयी है। यह भाषा भारतवासियों को एक दूसरे से जोड़ती हैं पर आज कल लोग अपनी मातृभाषा को छोड़कर दूसरी भाषा को बढ़ावा दे रहे हैं। माना कि दूसरी भाषाएँ सीखना भी ज़रूरी है लेकिन अपनी मातृभाषा को भूल जाना तो ठीक नहीं है। आज कल ज़्यादातर नौकरियां पाने के लिए अंग्रेजी आना बहुत ज़रूरी है। मैं इस बात से सहमत नहीं हूँ। ऐसा देश जहाँ पर हिंदी गर्व से बोली जानी चाहिए वहां पर लोगों को अंग्रेजी सीखने पर मजबूर होना पड़ रहा है। मेरे विचार यह है कि नौकरियां पाने के लिए अंग्रेजी के साथ साथ हिंदी भाषा का भी उपयोग किया जाए। हिंदी भाषा अब अंतर्राष्ट्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त करने की राह पर है। हमें इस बात पर गर्व होना चाहिए।

डिजिटल बाल मेला बच्चों को हिंदी के प्रति जागरूक करना चाहता है साथ ही अपील करता है कि बच्चे आधुनिकता की होड़ में अपने मातृभाषा को नहीं भूलें| बच्चों के लिए अपनी मातृभाषा “हिंदी” का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है|डिजिटल बाल मेला एक ऐसा मंच है जो बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए निरंतर कार्य कर रहा है| इसके लिए डिजिटल बाल मेला कई अभियानों का आयोजन कर चुका है| अपने बच्चे को डिजिटल बाल मेला से जोड़ने के लिए आप 8005915026 पर संपर्क करें|

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