झील के पानी पर तैरता हुआ दिखता है ये महल।
शिवाक्ष शर्मा।
भारत में ऐसी कई एतिहासिक इमारतें हैं, जो बेहद ही खास और अनोखी हैं। खासकर राजस्थान में तो ऐसी एतिहासिक इमारतों की भरमार है, जो सैकड़ों साल पुरानी हैं और कुछ तो हजारों साल। यहीं इमारतें भारत की आन-बान और शान भी कहलाती हैं और विरासत भी। इन्हीं विरासतों में से एक है जयपुर का जल महल।
महाराज माधो सिंह द्वारा 1750 में बनवाया गया यह महल कभी भी भव्य नहीं था, महाराजा चाहते थे कि जब वे बत्तख के शिकार के लिए जाएं तो उनके लिए एक साधारण सा घर हो। 18वीं शताब्दी में माधो के बेटे माधो सिंह द्वितीय ने आंगन के मैदान जोड़कर और बाहरी हिस्से में बदलाव करके इमारत की खूबसूरती बढ़ाने का फैसला किया। राजस्थान के बहोत से शासको ने समय-समय पर इसकी मरम्मत भी करवाई और 18 वी शताब्दी में आमेर के जय सिंह द्वितीय ने इसका पुनर्निर्माण करवाया।
इसे बने हुए 222 साल हो गए हैं लेकिन यह आज भी पहले जैसी ही भव्यता के साथ खड़ा है। जल महल को अंडरवॉटर पैलेस, फ्लोटिंग पैलेस या वॉटर पैलेस जैसे कई नामों से जाना जाता है। इसे राजपूत और मुगल वास्तुकला का सबसे बेहतरीन उदाहरण माना जाता है।
जल महल के निर्माण में लाल बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया था। महल के टॉप पर बंगाली शैली में बनी एक बड़ी आयताकार छतरी है। इस पांच मंजिला जल महल की सबसे खास बात यह है कि इसकी केवल एक मंजिल ही पानी के ऊपर दिखाई देती है जबकि मान सागर झील बनने के बाद बाकी चार मंजिलें पानी में डूब गईं हैं। ऐसा लगता है कि महल झील के पानी पर तैर रहा है। इस महल से पहाड़ों और झील का खूबसूरत नजारा देखा जा सकता है। खासकर चांदनी रात में झील के पानी में यह महल बहुत खूबसूरत दिखता है। जल महल से मान सागर झील और नाहरगढ़ का अद्भुत नजारा दिखता है।
आपको बता दें बारिश के मौसम में जल महल की सुंदरता में चार चांद लग जाते है। यहां का नजारा सबसे सुंदर होता है इसलिए बारिश के मौसम में स्थानीय लोगों और पर्यटकों की पहल पसंद बन जाता हैं।
राजस्थान के 75वें स्थापना दिवस के मौके पर डिजिटल बाल मेला ने नये अभियान “रूट्स ऑफ राजस्थान” की है। आपको बता दें की इस अभियान का उद्देश्य बच्चों के दृष्टिकोण से राजस्थान की कला, संस्कृति एवं पर्यटन को बढ़ावा देना एवं बच्चों को राजस्थान की विरासत से परिचित करवाना है।
इसमें बच्चों को आठ से दस मिनट तक की वीडियो बनानी है जिसमें राजस्थान के पर्यटन स्थल एवं राजस्थान की कला और संस्कृति का विवरण हो।
अपनी वीडियो को आप डिजिटल बाल मेला के टेलीग्राम, वाट्सएप एवं अधिकारिक वेबसाइट पर भेज सकते हैं। हर महीने सबसे श्रेष्ठ वीडियो भेजने वाले बच्चे को मोबाइल फोन ईनाम में मिलेगा एवं टॉप 100 बच्चों को विश्व पर्यटन दिवस पर को तीन दिन का जयपुर भ्रमण करवाया जाएगा एवं तभी प्रथम स्थान पर रहने वाले बच्चे को पचास हज़ार का ईनाम, द्वितीय स्थान को बीस हज़ार, तृतीय स्थान को दस हज़ार के ईनाम से नवाज़ा जाएगा।
डिजिटल बाल मेला इससे पहले भी बच्चों की रचनात्मकता बढ़ाने के लिए “शेड्स ऑफ कोविड”
म्यूजियम थ्रू माय आइज” जैसे अभियानों का आयोजन कर चुका है।
अधिक जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स को फॉलो करें –
Facebook – https://www.fb.com/digitalbaalmela/
Instagram – https://instagram.com/digitalbaalmela
Twitter – https://twitter.com/DigitalBaalMela
YouTube – https://bit.ly/3xRYkNz

