अंदर छुपा है रहस्यमय खजाना, जिसे आज तक नहीं ढूंढ पाया कोई।
शिवाक्ष शर्मा।
भारत में ऐसे कई प्राचीन किले हैं, जो अपने आप में बेहद ही खास और रहस्यों से भरे हुए हैं। एक ऐसा ही किला अरावली की पहाड़ियों पर स्थित है।
बाला किला राजस्थान के अलवर में स्थित है और इसलिए इसे अलवर का किला भी कहा जाता है। इस किले की एक खासियत यह भी है कि यह अलवर शहर की एक पहाड़ी पर स्थित है और सबसे पुरानी इमारत है। पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यहां से शहर का बेहद ही खूबसूरत नजारा भी दिखाई देता है।
यूं तो इस किले का प्रमुख नाम बाला किला है। लेकिन यह सिर्फ इसी एक नाम से प्रसिद्ध नहीं है। बल्कि अधिकतर लोग इसे अलवर के किले के नाम से भी जानते हैं। इस किले का निर्माण 1492 में किया गया था, लेकिन बाद में राजा प्रताप सिंह ने अलवर की स्थापना की और इस किले को भी अलवर के किले के नाम से जाना जाने लगा।
अलवर के इस किले को राजस्थान में सबसे बड़े किलों में गिना जाता हैं। यह किला 5 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है। किले के रास्ते पर 6 प्रवेश द्वार हैं और उनका नाम है चांद पोल, सूरज पोल, कृष्ण पोल, लक्ष्मण पोल, अंधेरी गेट और जय पोल. इन दरवाजों का नाम शासकों के नाम पर रखा गया है। यह किला कई शैलियों में बनाया गया है। किले की दीवारों पर खूबसूरत मूर्तियां और नक्काशियां है जो वाकई आकर्षक हैं। किले में सूरज कुंड, सलीम नगर तलाब, जल महल और निकुंभ महल पैलेस जैसे कई भवन बने हैं और कई मंदिर भी हैं. किले के अंदर 15 बड़े और 51 छोटे टावर बने हुए हैं जो यहां की सुरक्षा को देखते हुए बनाया गया था। इस किले की दीवारों में 446 छेद हैं जिससे गोलियां चलाई जाती थी। इसके अलावा 15 बड़े और 51 छोटे बुर्ज मौजूद हैं।
कहते हैं इस किले में बाबर और जहांगीर की रुक चुके हैं। बाबर ने बस यहां एक रात गुजारी थी और जहांगीर महल के जिस कमरे में ठहरे थे, उसे आज सलीम महल के नाम से जाना जाता है। कहते हैं कि इस किले के अंदर बेशकीमती खजाना छुपा हुआ है। माना जाता है कि वो खजाना धन के देवता कुबेर का है, लेकिन ये खजाना एक रहस्य ही है, क्योंकि आज तक कोई भी ढूंढ नहीं पाया है।
राजस्थान के 75वें स्थापना दिवस के मौके पर डिजिटल बाल मेला ने नये अभियान “रूट्स ऑफ राजस्थान” की है। आपको बता दें की इस अभियान का उद्देश्य बच्चों के दृष्टिकोण से राजस्थान की कला, संस्कृति एवं पर्यटन को बढ़ावा देना एवं बच्चों को राजस्थान की विरासत से परिचित करवाना है।
इसमें बच्चों को आठ से दस मिनट तक की वीडियो बनानी है जिसमें राजस्थान के पर्यटन स्थल एवं राजस्थान की कला और संस्कृति का विवरण हो।
अपनी वीडियो को आप डिजिटल बाल मेला के टेलीग्राम, वाट्सएप एवं अधिकारिक वेबसाइट पर भेज सकते हैं। हर महीने सबसे श्रेष्ठ वीडियो भेजने वाले बच्चे को मोबाइल फोन ईनाम में मिलेगा एवं टॉप 100 बच्चों को विश्व पर्यटन दिवस पर तीन दिन का जयपुर भ्रमण करवाया जाएगा एवं तभी प्रथम स्थान पर रहने वाले बच्चे को पचास हज़ार का ईनाम, द्वितीय स्थान को बीस हज़ार, तृतीय स्थान को दस हज़ार के ईनाम से नवाज़ा जाएगा।
डिजिटल बाल मेला इससे पहले भी बच्चों की रचनात्मकता बढ़ाने के लिए “शेड्स ऑफ कोविड”
म्यूजियम थ्रू माय आइज” जैसे अभियानों का आयोजन कर चुका है।
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