बाल विवाह का विरोध कर कैसे राष्ट्रीय खिलाड़ी बनी सीमा मीणा ?

ओमप्रकाश ढाका

अंतर्राष्ट्रीय बाल दिवस 20 नवंबर 2023 के अवसर पर जवाहर कला केंद्र के शिल्पग्राम डिजिटल बाल मेला और यूनिसेफ द्वारा आयोजित Blue street & Ed talk में महात्मा गांधी गवर्मेंट स्कूल, गांधीनगर की पूर्व छात्रा सीमा मीणा ने अपने जीवन और संघर्ष के बारे में बताया। सीमा मीणा ने बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ लड़ाई लड़ी। सीमा मीणा जब कक्षा 6 में थी तब उसने अपने बाल विवाह का विरोध किया और समाज से बहुत लम्बी लड़ाई लड़ी। सीमा मीणा राष्ट्रीय हैंडबॉल खिलाड़ी भी है। अंतरराष्ट्रीय बाल दिवस पर बाल दिवस की अहमियत बताते हुए सीमा ने कहा कि बेटा और बेटी को समान समझने की सोच हमें अपने परिवार से ही विकसित करनी चाहिए। दोनों को आगे बढ़ाने में एक समान अवसर प्रदान किए जाने चाहिए क्योंकि अभी के समय में भी लड़की पर हर तरीके के अत्याचार किए जाते है। लड़कियों को बचपन से दबाने की कोशिश परिवार से ही शुरू हो जाती है जैसे कि तू लड़की है रात को बाहर मत जाना, तू ज्यादा तेज आवाज में बात मत करना, छोटे कपड़े पहनकर बाहर मत जाया कर समाज क्या सोचेगा आदि। सीमा ने बोला कि मेरे मन में यह सवाल उठता है कि जब लड़की के साथ कुछ गलत होता है तो यही समाज कहां जाता है। कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो आज भी समाज में अनेकों परिवार में देखा जाता है कि उन्हें अच्छी बहू तो चाहिए परन्तु जब अपने ही घर में बेटी जन्म लेती है उनको ऐसा प्रतीत होता है कि दुनियाभर का बोझ उन्हीं पर आ गया है।

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