बाल लेखक पारस माली।
25 जनवरी को देश में हर साल मतदान दिवस एक त्यौहार की तरह मनाया जाता है। देश में लोकतांत्रिक नींव रखने के लिए वहां के लोगों का मतदान करना बहुत जरूरी है। एक देश तभी मजबूत बन सकता है जब उस देश के सभी लोग वोट दे। वोट देने को लेकर लोगों के अंदर जागरूकता फैलाने के लिए यह दिवस हर साल 25 नवंबर को मनाया जाता है। भारतीय संविधान में हर नागरिकों को कुछ अधिकार है जिसमें से मुख्य अधिकार है मतदान का भी है। देश में हर 5 साल में मतदान होता है जिस पर सभी लोग मतदान करते हैं और अपना व्यक्ति चुनते हैं। भारत 1947 में आजादी के 3 साल बाद 1950 में 26 जनवरी को संविधान लागू किया था। एक दिन पहले यानी 25 जनवरी 1950 को चुनाव आयोग की स्थापना हुई थी। जिसकी वजह से आज भारत के चुनाव आयोग की स्थापना दिवस के दिन ही राष्ट्रीय मतदान दिवस मनाने का फैसला लिया गया। इस दिन के बाद से हर साल 25 जनवरी को मतदान दिवस मनाया जाने लगा।
अंत में मैं आप सभी को मतदान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देना चाहूंगा।
धन्यवाद।
डिजिटल बाल मेला ने जनवरी माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।
डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।
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