उनके जन्म दिवस पर किया याद
बाल लेखक जिया
अब्राहम लिंकन का जन्म 12 फरवरी, 1809 को अमेरिका के केंटकी प्रांत के एक गाँव में हुआ था।*
अब्राहम लिंकन विलक्षण प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व और अति प्रेरणादायीमें थे।
उनके माता-पिता की बचपन में ही मृत्यु हो गई थी जिसके बाद लिंकन की देखभाल उनकी बड़ी बहन ने की ।
वे एक साल से भी कम अवधि की स्कूली शिक्षा ग्रहण कर सके एवं कार्य का दबाव बहुत अधिक होने के बावजूद उन्हों
सेना में कप्तानी एवं पोस्टमास्टर की नौकरी के दौरान उन्होंने स्थानीय सभा का चुनाव लड़ा, लेकिन वे हार गए। परंतु *1834 में पुन: चुनाव में उनकी जीत हुई तथा वे लगातार 3 बार चुनाव जीते* ।
अब्राहम लिंकन को अपनी सरलता, करुणा, दयालुता के साथ दासों को सामान्य जन की गरिमा दिलाने हेतु संघर्ष करने और उसमें विजयी होने तथा अमेरिकी गृह-युद्ध को समाप्त करके शांति स्थापित करने के लिये जाना जाता है।
वस्तुत: अपने काम के दौरान की गई यात्राओं के समय उन्होंने नीग्रो (काले) लोगों को जंजीरों से बँधे एवं कोडों से पिटते तथा गुलाम बनाई गई महिलाओं को जबरन बेच जाते देखा था ।
उपर्युक्त घटनाओं ने लिंकन के मन को गहराई तक प्रभावित किया तथा उनके मन में दास प्रथा के विरुद्ध गहरी धारणा बन गई।
अमेरिका में 1830 में दास प्रथा की समाप्ति के लिये आंदोलन प्रारंभ हो गया और अब्राहम लिंकन भी इस आंदोलन के समर्थक थे।
4 मार्च, 1865 को वे पुन: अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए, परंतु 14 अप्रैल, 1865 को नाटक देखने के दौरान एक रंगवर्गी ने नस्लीय घृणा के वशीभूत होकर लिंकन की गोली मारकर हत्या कर दी।
उनका मानना था कि किसी भी कार्य को करने से पहले हमें उस कार्य के प्रति मज़बूत इरादों वाला और कुशल बनना चाहिये ताकि कठिन कार्य को भी सरलता से किया जा सके।
इसी संदर्भ में उन्होंने कहा था कि ‘‘यदि मुझे एक पेड़ काटने के लिये 6 घंटे दिये जाएँ तो मैं पहले 4 घंटे अपनी कुल्हाड़ी की धार तेज करने* में लगाऊँगा।’’
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