बाल लेखिका अक्षरा।
10 जनवरी, विश्व हिंदी दिवस| सबसे पहले विश्व हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ। पूरे भारत में 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है परन्तु 10 जनवरी पूरे विश्व में विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। विदेशों में भारत के दूतावास इस दिन को विशेष रूप में मनाते है। प्रथम विश्व हिंदी दिवस सम्मेलन पहली बार 10 जनवरी 1974 को नागपुर में आयोजित हुआ था। तब से इस दिन को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाते है। विश्व हिंदी दिवस 10 जनवरी 2006 को मनाया गया था। हिंदी हमारे देश की जान और पहचान है। हिंदी भाषा को बोलने पर हमें गर्व होना चाहिए। भले ही सभी एक दिन हिंदी दिवस या विश्व हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ देते हो परन्तु हमारे देश में हिंदी का महत्व कम होता जा रहा है। अगर आज कहीं भजी देखा जाए तो हिंदी का कोई महत्व नहीं दे रहा है फिर चाहे वो हिंदी वेश – भूषा हो या भाषा सभी आजकल अंग्रेजी के पीछे पड़े हुए है| हालांक जो विदेशों के लोग है वह सनातन धर्म और हिंदी को बढ़ावा दे रहे है। यह बहुत ही शर्म की बात है कि हिंदी अपने देश में अपमानित हो रही है। हिंदी ने विदेशों में तो अपनी जगह बना ली है पर पता नहीं क्यों हम भारतीय हिंदी को पीछे कर रहे है। हम जिस दिशा में जा रहे हैं उस दिशा के लोग हमारी वेश–भूषा और भाषा को अपना रहे है।
हिंदी भाषा में वह रस है जो किसी अन्य भाषा में नही है यह बात अब सभी जान चुके हैं लेकिन हम ही हिंदी को पीछे कर रहे है। इसलिए सरकार ने भी यह आयोजित किया है कि हिंदी को बढ़ावा दिया जाए। हम सभी को भी इसमें अपना योगदान देना है। हर भारतीय गर्व से यह कह सकें कि हमारे भारत की भाषा है हिंदी। हमें गर्व है इस भाषा पर। संस्कृत की एक लाडली बेटी है हिंदी। बहनों को साथ लेकर चलती है हिंदी। सुंदर है, मनोरम है, मीठी है सरल है, ओजस्विनी है और अनूठी है ये हिंदी। पाथेय है, प्रवास में, परिचय का सूत्र है, मैत्री को जोड़ने की सांकल है ये ये हिंदी। पढ़ने व पढ़ाने में सहज है ये हिंदी।
डिजिटल बाल मेला ने जनवरी माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।
डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।
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