Author name: Digital Baal Mela

कसौली के तुषार आनंद ने बताया अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस का महत्व।

लोकतंत्र हमारे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम है जो समरसता, स्वतंत्रता, और न्याय की ओर हमें ले जाता है। बाल लेखक तुषार आनंद। आंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस, जो हर साल 15 सितंबर को मनाया जाता है, लोकतंत्र के महत्व को याद दिलाने का महत्वपूर्ण दिन है। “लोकतंत्र” शब्द संस्कृत मूल से आया है, जिसका अर्थ […]

कसौली के तुषार आनंद ने बताया अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस का महत्व। Read More »

हनुमानगढ़ के पारस माली ने बताया अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस का महत्व।

इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों के अंदर लोकतंत्र के लिए जागरूकता पैदा करना है। बाल लेखक पारस माली। हर वर्ष 15 सितंबर को अतंरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस में लोगों के बारे में लोगों के लिए लोकतंत्र की महत्व याद करने का अवसर देता है। लोकतंत्र का मुख्य उद्देश्य पूरे

हनुमानगढ़ के पारस माली ने बताया अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस का महत्व। Read More »

रामनगर की अंजली ने ने अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस का समझाया महत्व।

अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस

अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस को मनाने के लिए लोगों के अलग-अलग संगठन बने होते हैं और अनेक तरीकों से इस उपलक्ष्य को मनाया जाता है। बाल लेखिका अंजली। नमस्कार, अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस की आप सभी को बहुत-बहुत बधाई हो। लोकतंत्र दो शब्दों से मिलकर बना है लोक + तंत्र। लोक का अर्थ जनता तथा तंत्र का

रामनगर की अंजली ने ने अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस का समझाया महत्व। Read More »

Issues raised under the campaign “Bacchon Ki Sarkaar Kaisi Ho?” 

Children gave important suggestions to the government, targeted on many subjects Shivaksh Sharma  Jaipur: Digital Children’s Fair under the aegis of Himachal Pradesh Legislative Assembly “How should the government of children be?” Campaign was organized. Under this campaign, on June 12, a children’s session was organized in the auditorium building of Himachal Pradesh Legislative Assembly,

Issues raised under the campaign “Bacchon Ki Sarkaar Kaisi Ho?”  Read More »

अजमेर के अच्युतम तिवारी ने हिंदी भाषा का बताया महत्व।

पूरे देश को एकता के सूत्र में बांधे रखती है हिंदी बाल लेखक अच्युतम। “निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटत न हिय के सूल’।” पहला हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 को मनाया गया था, जब भारत के प्रधान मंत्री ने इस दिन को हिंदी दिवस के रूप

अजमेर के अच्युतम तिवारी ने हिंदी भाषा का बताया महत्व। Read More »

“बच्चों की सरकार कैसी हो?” अभियान के तहत उठे मुद्दे

बच्चों ने सरकार को दिए अहम  सुझाव, कई विषयों पर साधा निशाना गर्वित शर्मा    जयपुर: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के तत्वाधान में डिजिटल बाल मेला द्वारा “बच्चों की सरकार कैसी हो?” अभियान का आयोजन किया गया| 12  जून को इसी अभियान के तहत शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सभागार भवन मने बाल सत्र का

“बच्चों की सरकार कैसी हो?” अभियान के तहत उठे मुद्दे Read More »

शिमला की खुशी उनियाल ने हिंदी दिवस पर मातृभाषा का समझाया महत्व।

अंग्रेजी का प्रभाव हिंदी पर दबाव डालते जा रहा है। बाल लेखिका खुशी उनियाल “आज सारे बच्चे मिठाइयाँ लाए हैं ! वाह,खुशी तुम भी लाई हो? क्या यह निखालिस रूप में है ? ” क्या आपके साथ ऐसा हुआ है कि आपकी हिंदी की अध्यापिका जी ने आपको कोई ऐसे शब्द से परिचित कराया हो,

शिमला की खुशी उनियाल ने हिंदी दिवस पर मातृभाषा का समझाया महत्व। Read More »

जयरामपुरा के पियूष योगी ने बताई, खेजडली गाँव की कहानी 

कैसे पेड़ों को बचाने के लिए उनसे चिपक गए ग्रामीण   बाल लेखक पीयूष योगी| एक समय में एक राजा हुआ करता था जिसका नाम राणा अभिजीत सिंह था| उनका राज 1730 में हुआ करता था|उनके नए महल के निर्माण के लिए लकड़ियां चाहिए थी|  उन्होंने मंत्री को यह आदेश दिया कि मेरे नए महल के

जयरामपुरा के पियूष योगी ने बताई, खेजडली गाँव की कहानी  Read More »

The children told – “Bacchon ki sarkar kesi ho?”

Listen, on which issues the children surrounded the government.. Shivanksh Sharma Jaipur:- What should be the government of children? 1108 children participating in the campaign told through their video entries which issues they would have given priority to if they were in the government. The children conveyed many such topics to the public through their

The children told – “Bacchon ki sarkar kesi ho?” Read More »

फुटबॉलर और पत्रकार के बाद बीरेन सिंह ने चुना राजनीति का पेशा 

मणिपुर के पहले भाजपा नेता जो बने हैं राज्य के मुख्यमंत्री  शिवाक्ष शर्मा  साल 1961 में मणिपुर के लुवांसंगबम ममंग लेइकाई में एक हिंदू परिवार में जन्मे बीरेन सिंह को बचपन से ही फुटबॉल में दिलचस्पी थी. जब वह 18 साल के थे, तब मणिपुर की राजधानी इंफाल में एक मैच के दौरान सीमा सुरक्षा

फुटबॉलर और पत्रकार के बाद बीरेन सिंह ने चुना राजनीति का पेशा  Read More »