हनुमानगढ़ जिले की इशिका, बाल भारती सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा, ने हनुमानगढ़ की कला, संस्कृति, स्मारक और लोकतंत्र के बारे में जानकारी दी।

हनुमानगढ़ राजस्थान का वह जिला है जिसे उत्तर भारत की दो महान संस्कृतियों, राजस्थानी और पंजाबी संस्कृति का संगम कहा जाता है और जो प्राचीन सरस्वती नदी यानी घग्गर नदी के किनारे बसा हुआ है। यदि इसकी कला और संस्कृति की बात करें तो यहाँ राजस्थानी घूमर और कालबेलिया के साथ पंजाबी भांगड़ा और गिद्दा भी समान उत्साह से देखा जाता है, यहाँ की महिलाएं फुलकारी, दरी और खेस बुनाई तथा मिट्टी के बर्तन बनाने की कला में निपुण हैं, भपंग और सारंगी यहाँ के प्रमुख लोक वाद्य हैं, और गोगामेड़ी का मेला, दशहरा, दीपावली, होली तथा लोहड़ी जैसे त्यौहार हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदाय के द्वारा मिलजुलकर मनाए जाते हैं, वहीं बाजरे की रोटी और सरसों के साग जैसा भोजन यहाँ की मिली-जुली संस्कृति को दर्शाता है।

स्मारकों की दृष्टि से हनुमानगढ़ इतिहास का खजाना है, इसका सबसे प्रमुख स्मारक लगभग 1700 साल पुराना भटनेर किला है जिसका निर्माण भाटी राजा भूपत ने करवाया था और जो कच्ची ईंटों से बना होने के बाद भी इतना मजबूत था कि 1398 में विश्व विजेता तैमूर लंग भी इसे एक महीने तक नहीं जीत सका और उसने अपनी आत्मकथा तुजुक-ए-तैमूरी में लिखा कि मैंने इतना मजबूत किला आज तक नहीं देखा, आज इस किले के अंदर हनुमान मंदिर और जामा मस्जिद दोनों स्थित हैं जो सांप्रदायिक एकता का प्रतीक है, दूसरा सबसे महत्वपूर्ण स्मारक कालीबंगा पुरातत्व स्थल है जो हड़प्पा सभ्यता का प्रमुख नगर था जहाँ खुदाई में 5000 साल पुराने जुते हुए खेत, अग्निकुंड और नगर नियोजन के अवशेष मिले हैं और यह यूनेस्को की विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल है, इसके अलावा गोगामेड़ी धाम जहाँ लोकदेवता गोगाजी को हिंदू और मुस्लिम दोनों पूजते हैं और ब्रह्माणी माता मंदिर भी यहाँ के प्रसिद्ध धार्मिक स्मारक हैं।

लोकतंत्र के क्षेत्र में हनुमानगढ़ एक जागरूक और मजबूत जिले के रूप में उभरा है, इंदिरा गांधी नहर और गंग नहर के कारण इसे राजस्थान का अन्न भंडार कहा जाता है और यहाँ का किसान अपने हक के प्रति अत्यंत जागरूक है, यहाँ पंचायती राज व्यवस्था बहुत सफल है जहाँ महिलाएँ सरपंच और वार्ड पंच के रूप में बढ़-चढ़कर नेतृत्व कर रही हैं, किसान आंदोलनों से लेकर विधानसभा चुनावों तक यहाँ मतदान प्रतिशत हमेशा अधिक रहता है, और सबसे बड़ी बात यह है कि यहाँ हिंदू, मुस्लिम, सिख सभी समुदाय एक साथ मिलकर सामाजिक लोकतंत्र की मिसाल पेश करते हैं।

संक्षेप में कहा जाए तो हनुमानगढ़ सिर्फ एक जिला नहीं है बल्कि यह कालीबंगा की 5000 साल पुरानी सभ्यता, भटनेर किले के 1700 साल पुराने शौर्य, रंग-बिरंगी कला-संस्कृति और आधुनिक जागरूक लोकतंत्र का एक जीवंत संगम है।

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