बताया इस दिवस का महत्व
बाल लेखक शौर्य मेहता
सतत विकास के एजेंडे की कुछ सबसे बड़ी चुनौतियों से निपटना – *स्वास्थ्य में सुधार से लेकर जलवायु परिवर्तन से निपटने तक – सभी प्रतिभाओं के दोहन पर निर्भर करेगा। इसका मतलब* है कि *इन क्षेत्रों में अधिक महिलाओं* को *काम मिल रहा है। अनुसंधान* में विविधता प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं के पूल का विस्तार करती है,
जिससे नए दृष्टिकोण, प्रतिभा और रचनात्मकता सामने आती है। यह दिवस एक अनुस्मारक है कि महिलाएं और लड़कियां विज्ञान और प्रौद्योगिकी समुदायों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और उनकी भागीदारी को मजबूत किया जाना चाहिए।
वर्तमान में वैश्विक समुदाय के सामने मौजूद सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना करने का मतलब सभी प्रतिभाओं का उपयोग करना होगा। चूँकि दुनिया लगातार कोविड-19 और गंभीर जलवायु संकट से जूझ रही है, विज्ञान और प्रौद्योगिकी समुदायों में महिलाओं और लड़कियों की पूर्ण और समान भागीदारी और नेतृत्व पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। अब अनुसंधान और नवाचार में महिलाओं के योगदान को पहचानने, रूढ़िवादिता को तोड़ने और विज्ञान में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ भेदभाव को हराने का समय आ गया है।
*चंद्रयान 3 की सफलता के पीछे* महिलाओं का योगदान भुलाया नहीं जा सकता। *रितु कारिधल श्रीवास्तव, कल्पना* *कालाहस्ती समेत* कई अन्य महिला वैज्ञानिकों के कारण चंद्रयान 3 की सफलता, भारत की अंतरिक्ष शक्ति और अंतरिक्ष अन्वेषण में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का प्रतीक है, जो युवाओं के लिए मार्ग प्रशस्त करती है।
एसटीएस-८७ की उड़ानोपरांत गतिविधियों के पूरा होने पर कल्पना जी ने अंतरिक्ष यात्री कार्यालय में, तकनीकी पदों पर काम किया, उनके यहाँ के कार्यकलाप को उनके साथियों ने विशेष पुरस्कार दे के सम्मानित किया।
1983 में वे एक उड़ान प्रशिक्षक और विमानन लेखक, जीन पियरे हैरीसन से मिलीं और शादी की और 1990 में एक देशीयकृत संयुक्त राज्य अमेरिका की नागरिक बनीं। *कल्पना चावला के यह शब्द सत्य हो गए,” मैं अंतरिक्ष के* *लिए ही बनी हूँ। प्रत्येक पल* *अंतरिक्ष के लिए ही बिताया* है *और इसी के लिए ही मरूँगी* ।“ आज के युग की महिलाएं और लड़कियां किसी से भी पीछे नहीं हैं, उन्होंने यह करके दिखाया है।
डिजिटल बाल मेला ने फरवरी माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।
डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।
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