उन्होंने बताया कि गर्मी से जुड़ी अधिकांश बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं से उचित जागरूकता और सावधानियों के माध्यम से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 विश्व स्तर पर अब तक का सबसे गर्म वर्ष दर्ज किया गया है, जो जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को दर्शाता है।
उन्होंने समझाया कि केवल दिन का तापमान ही नहीं, बल्कि रात का तापमान भी लोगों के स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। यदि दिन का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस हो, तो शरीर को रात के समय कुछ राहत मिल जाती है। लेकिन यदि दिन और रात दोनों समय तापमान लगभग 40 डिग्री सेल्सियस बना रहे, तो लोगों को अधिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है क्योंकि शरीर को पर्याप्त आराम और ठंडक नहीं मिल पाती।
उन्होंने बताया कि भारत के लगभग 95 शहर अत्यधिक गर्मी की समस्या से प्रभावित हैं, जहाँ तापमान अक्सर 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है। इससे स्पष्ट होता है कि भारत के लिए भीषण गर्मी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय चुनौती बन चुकी है।
भारत में गर्मी से निपटने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में अहमदाबाद में भीषण गर्मी के दौरान ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई थी, जैसी कोविड-19 महामारी के समय देखने को मिली थी। उस दौरान लगातार एम्बुलेंस की आवाज़ें सुनाई देती थीं, अस्पतालों में बिस्तर भर गए थे और बड़ी संख्या में लोगों को गर्मी से संबंधित बीमारियों के कारण भर्ती करना पड़ा था।
इस अनुभव के बाद वर्ष 2013 में अहमदाबाद में दक्षिण-पूर्व एशिया का पहला ‘हीट एक्शन प्लान’ (Heat Action Plan) लागू किया गया। यह एक ऐसी रूपरेखा है जिसके अंतर्गत विभिन्न सरकारी विभाग समन्वित रूप से कार्य करते हुए आम नागरिकों को भीषण गर्मी के प्रभावों से बचाने का प्रयास करते हैं। इस योजना में ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ (Early Warning System) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जिसके माध्यम से समय रहते चेतावनी जारी की जाती है। इसमें रंग-आधारित अलर्ट प्रणाली का उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए, जब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने की संभावना होती है, तो ‘रेड अलर्ट’ जारी किया जाता है, जिसके बाद संबंधित विभागों द्वारा आवश्यक प्रशासनिक और सुरक्षा उपाय लागू किए जाते हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जयपुर के कंस्टीटूशन क्लब में मीडिया कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए आई.आई.पी.एच. के प्रोफेसर महावीर गोलछा ने भीषण गर्मी (Heatwave) और उससे होने वाले प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।

